राजस्थान

सिरोही: मासूम बंदर के बच्चे की गर्दन में फंसा स्टील का लोटा, 4 दिनों से भूखा-प्यासा भटक रहा नन्हा जीव

गणपत सिंह मांडोली · 09 अप्रैल 2026, 05:38 शाम
सिरोही में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है जहां एक नन्हा बंदर अपनी गर्दन में स्टील का लोटा फंसने के कारण चार दिनों से तड़प रहा है। प्रशासन ने रेस्क्यू टीम बुलाई है।

सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले से एक अत्यंत मार्मिक और हृदयविदारक दृश्य सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। एक नन्हा बंदर पिछले चार दिनों से मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष कर रहा है।

इस मासूम बंदर के बच्चे की गर्दन में एक स्टील का लोटा बुरी तरह फंस गया है। इसकी वजह से वह न तो कुछ खा पा रहा है और न ही पानी की एक बूंद पी पा रहा है।

भूख और प्यास से बेहाल मासूम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह नन्हा जीव अपनी मां के साथ शहर की सड़कों और पेड़ों पर भटक रहा है। उसकी हालत देखकर स्थानीय लोग काफी दुखी और चिंतित हैं।

चार दिनों से अन्न और जल के बिना रहने के कारण बंदर का बच्चा काफी कमजोर हो गया है। उसकी मां भी अपने बच्चे की इस पीड़ा को देखकर व्याकुल है और उसे अकेला नहीं छोड़ रही। 

मां का ममतामयी पहरा

हैरानी की बात यह है कि बंदरिया अपने बच्चे की हर सांस की रखवाली कर रही है। वह किसी को भी बच्चे के पास आने नहीं दे रही है, जिससे मदद करना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

वह लगातार अपने बच्चे को सीने से लगाए इधर-उधर घूम रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मां की ममता और बेबसी का ऐसा संगम पहले कभी नहीं देखा गया।

समाजसेवी और प्रशासन की पहल

इस गंभीर स्थिति की जानकारी मिलते ही समाजसेवी तृप्ति जैन ने तुरंत सक्रियता दिखाई। उन्होंने इस बेजुबान की जान बचाने के लिए प्रशासन से संपर्क साधा।

तृप्ति जैन ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) डॉ. राजेश गोयल को मामले की गंभीरता से अवगत कराया। उन्होंने मांग की कि जल्द से जल्द बच्चे को इस संकट से निकाला जाए। 

माउंट आबू से बुलाई गई रेस्क्यू टीम

एडीएम डॉ. राजेश गोयल ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तुरंत वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए। स्थिति की जटिलता को देखते हुए माउंट आबू से एक विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम बुलाई गई है।

यह टीम जंगली जानवरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और उनका उपचार करने में माहिर है। टीम के सदस्यों का कहना है कि यह ऑपरेशन काफी संवेदनशील होने वाला है।

रेस्क्यू ऑपरेशन की रणनीति

रेस्क्यू टीम के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती बंदर की मां है। बच्चे को बचाने के लिए पहले मां को सुरक्षित तरीके से पकड़ना पड़ सकता है ताकि वह बचाव के दौरान हमला न करे।

एक बार मां को सुरक्षित दूरी पर करने के बाद, विशेषज्ञ कटर या अन्य उपकरणों की मदद से बच्चे की गर्दन से उस स्टील के लोटे को सावधानीपूर्वक हटाएंगे।

शहरवासियों में उम्मीद की किरण

पूरे सिरोही शहर की नजरें अब इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई हैं। लोग प्रार्थना कर रहे हैं कि यह नन्हा बंदर जल्द ही इस मुसीबत से आजाद हो जाए और फिर से स्वस्थ हो सके।

जीव प्रेमियों ने प्रशासन से अपील की है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाए। फिलहाल, सभी को रेस्क्यू टीम के सफल अभियान का इंतजार है ताकि मासूम को नया जीवन मिल सके।

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