सिरोही | नगर परिषद सभापति चुनाव का परिणाम आने के बाद सिरोही की राजनीति में सौगंध और वोट का एक दिलचस्प गणित चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव से पहले भाजपा के पांच पार्षदों के मंदिर पहुंचकर पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की सौगंध लेने का मामला सामने आया था, लेकिन परिणाम में भाजपा प्रत्याशी पूजा माली को केवल पांच मत मिले।
चुनावी आंकड़ों ने शहर में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि मंदिर में सौगंध लेने वाले पांचों पार्षदों ने भाजपा प्रत्याशी को मतदान किया और प्रत्याशी का अपना वोट भी उनके साथ था, तो भाजपा के खाते में पांच से अधिक मत क्यों नहीं आए।
इन पांच पार्षदों ने ली थी सौगंध
सभापति चुनाव से पहले वार्ड संख्या 1 की भाजपा पार्षद पूनम अनिल प्रजापत, वार्ड संख्या 16 के मनीष प्रजापत, वार्ड संख्या 17 के गौरव, वार्ड संख्या 19 की संतोष और वार्ड संख्या 21 के सुनील गुप्ता के शनेश्वरजी महादेव मंदिर पहुंचकर सौगंध लेने का मामला चर्चा में रहा।
पार्षदों ने कथित रूप से भगवान के समक्ष भाजपा की अधिकृत सभापति प्रत्याशी पूजा माली के पक्ष में मतदान करने की बात कही थी। इस घटनाक्रम के वीडियो भी सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में चर्चा तेज हो गई थी।
भाजपा प्रत्याशी को मिले केवल पांच वोट
सिरोही नगर परिषद के कुल 35 पार्षदों में कांग्रेस के 23, भाजपा के 10 और दो निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे। सभापति चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रितु जैन को 30 और भाजपा प्रत्याशी पूजा माली को केवल पांच मत मिले।
परिणाम के आंकड़ों के अनुसार भाजपा को अपने निर्वाचित पार्षदों की संख्या से पांच मत कम मिले। कांग्रेस ने दावा किया कि उसके 23 पार्षदों और दो निर्दलीयों के साथ भाजपा खेमे से भी पांच वोट रितु जैन के पक्ष में आए।
हालांकि मतदान गोपनीय था। इसलिए यह आधिकारिक रूप से निर्धारित नहीं किया जा सकता कि किस भाजपा पार्षद ने अपनी पार्टी की प्रत्याशी को वोट दिया और किसने किसी अन्य उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया।
पूजा माली सौगंध लेने वाले पांच पार्षदों में शामिल नहीं थीं
चुनावी पहेली का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मंदिर में सौगंध लेने वाले पांच पार्षद अलग थे और भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी पूजा माली उन पांच लोगों में शामिल नहीं थीं।
सामान्य राजनीतिक अनुमान के अनुसार प्रत्याशी अपना मत स्वयं के पक्ष में देती हैं। यदि पूजा माली का अपना मत और सौगंध लेने वाले पांचों पार्षदों के मत भाजपा के पक्ष में जोड़े जाएं, तो पार्टी को कम से कम छह मत मिलने चाहिए थे। इसके विपरीत भाजपा प्रत्याशी को केवल पांच वोट मिले।
यह केवल चुनाव परिणाम पर आधारित राजनीतिक गणना है। गोपनीय मतदान के कारण यह भी आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सकता कि प्रत्याशी सहित संबंधित पार्षदों ने वास्तव में किसे वोट दिया।
सौगंध किसकी सच्ची, सवाल किस पर?
चुनाव परिणाम के बाद सिरोही के राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि मंदिर में सौगंध लेने वाले पांच पार्षदों में से क्या किसी ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं किया, या फिर पार्टी के अन्य पार्षदों का मतदान अनुमान से अलग रहा।
इन सवालों का प्रमाणित उत्तर उपलब्ध नहीं है। किसी भी पार्षद को केवल चुनावी गणित के आधार पर क्रॉस वोटिंग के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। मतदान की गोपनीयता के कारण व्यक्तिगत मत की पुष्टि नहीं की जा सकती।
सियासी गलियारों में चल रहा व्यंग्य
परिणाम के बाद शहर में राजनीतिक व्यंग्य भी चर्चा में है—‘सौगंध पांच की, प्रत्याशी का वोट अलग, फिर भाजपा के खाते में हिसाब इतना कम क्यों?’
यह सवाल भाजपा की स्थानीय इकाई के भीतर विश्वास और समन्वय की स्थिति को भी सामने लाता है। पार्टी के 10 पार्षद होने के बावजूद अधिकृत उम्मीदवार को पांच मत मिलना पहले ही संगठन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अब मंदिर में हुई सौगंध के वीडियो ने इस चर्चा को नया आयाम दे दिया है।
संगठन ने सौगंध दिलवाई या पार्षद स्वयं पहुंचे?
यह भी स्पष्ट नहीं है कि पांचों पार्षद पार्टी संगठन के निर्देश पर मंदिर पहुंचे थे या उन्होंने अपनी ओर से सौगंध लेने का निर्णय किया था। सभी पार्षदों के एक जैसे व्यवहार और लगभग समान संदेश ने राजनीतिक चर्चाओं को जरूर बढ़ाया है।
इस संबंध में भाजपा संगठन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मंदिर में सौगंध लेने की यह प्रक्रिया किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में हुई।
गोपनीय मतदान के कारण पहेली का निर्णायक उत्तर नहीं
सभापति पद का चुनाव गोपनीय मतदान के माध्यम से हुआ था। इसलिए मतपेटी से केवल प्रत्याशियों को मिले कुल मतों की जानकारी सामने आई है, किसी पार्षद के व्यक्तिगत मतदान की नहीं।
यही कारण है कि चुनाव परिणाम के आधार पर प्रश्न तो उठाए जा सकते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की सौगंध को सच्चा या झूठा घोषित नहीं किया जा सकता। संबंधित पार्षदों के अपने बयान ही उनके राजनीतिक रुख को सामने रख सकते हैं, मत की आधिकारिक पुष्टि नहीं।
भाजपा के सामने आंतरिक समीक्षा की चुनौती
भाजपा के लिए अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि उसके 10 पार्षदों में से अधिकृत प्रत्याशी को केवल पांच मत क्यों मिले। उम्मीदवार चयन, पार्षदों की नाराजगी, स्थानीय संगठन की रणनीति और चुनाव प्रबंधन जैसे विषय पार्टी की आंतरिक समीक्षा का हिस्सा बन सकते हैं।
सौगंध लेने वाले पार्षदों के वीडियो और चुनाव परिणाम के बीच दिखाई दे रहा गणितीय अंतर सिरोही की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रमाणित उत्तर भले उपलब्ध न हो, लेकिन ‘सौगंध बनाम वोट’ की यह सियासी पहेली फिलहाल आसानी से समाप्त होती दिखाई नहीं दे रही है।