राजनीति

सिरोही भाजपा में घमासान: रक्षा भंडारी के खिलाफ पोस्टर, पुतला दहन का ऐलान

गणपत सिंह मांडोली · 02 सितम्बर 2026, 10:27 दोपहर
आबूरोड में नगर पालिका चुनाव टिकट वितरण को लेकर सिरोही भाजपा में असंतोष। विप्र समाज ने जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए पुतला दहन की घोषणा की है।

आबूरोड/सिरोही | नगर पालिका चुनाव की प्रक्रिया के बीच सिरोही भाजपा में टिकट वितरण को लेकर सामाजिक असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। आबूरोड में विप्र समाज के नाम से जारी एक पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।

पोस्टर में भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भंडारी पर नगर पालिका चुनाव में ब्राह्मण समाज की अनदेखी करने और समाज के दावेदारों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं देने का आरोप लगाया गया है।

विरोध में पुतला दहन का ऐलान

विरोधस्वरूप विप्र समाज आबूरोड की ओर से बुधवार, 2 सितंबर को शाम पांच बजे भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी का पुतला दहन करने का कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है।

पोस्टर के अनुसार, समाज के लोग परशुराम धर्मशाला से स्टेशन चौराहे तक पहुंचेंगे, जहां यह विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

पोस्टर में लिखा—‘भाजपा तुझसे बैर नहीं, रक्षा तेरी खैर नहीं’

वायरल पोस्टर में सबसे प्रमुख नारा है—

“भाजपा तुझसे बैर नहीं, रक्षा तेरी खैर नहीं।”

इस नारे के माध्यम से विरोध कर रहे लोगों ने भाजपा के बजाय सीधे जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी को निशाने पर लिया है।

इससे यह संकेत मिलता है कि समाज फिलहाल अपने विरोध को पार्टी की विचारधारा या प्रदेश नेतृत्व के विरुद्ध न बताकर स्थानीय संगठन और टिकट वितरण से जुड़े निर्णयों तक सीमित रखना चाहता है।

उपेक्षा से समाज में भारी रोष

पोस्टर में दावा किया गया है कि विप्र समाज लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मतदाता और समर्थक रहा है।

लेकिन आबूरोड नगर पालिका चुनाव में समाज के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। इसी कथित उपेक्षा के कारण समाज में भारी रोष व्याप्त होने की बात कही गई है।

पुतला दहन के जरिए शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

पोस्टर में विप्र समाज के लोगों से परिवार सहित अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई है।

इससे साफ है कि आयोजक इस विरोध को केवल सांकेतिक पुतला दहन तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक शक्ति प्रदर्शन का रूप देना चाहते हैं।

पोस्टर में आयोजक का नाम नहीं

हालांकि, पोस्टर में किसी पदाधिकारी अथवा आयोजन समिति के सदस्य का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज नहीं है। निवेदक के रूप में केवल ‘विप्र समाज आबूरोड’ लिखा गया है।

ऐसे में कार्यक्रम के आयोजकों, उनकी अधिकृत भूमिका और समाज के भीतर इस निर्णय पर बनी सहमति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

चुनाव के बीच भाजपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है विवाद?

नगर पालिका चुनाव में टिकट वितरण के बाद दावेदारों और उनके समर्थकों की नाराजगी सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा मानी जाती है।

लेकिन जब व्यक्तिगत दावेदारी का विवाद किसी समाज के प्रतिनिधित्व के सवाल में बदल जाता है, तो उसका राजनीतिक प्रभाव बढ़ सकता है।

भाजपा के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

आबूरोड में विप्र समाज का यह विरोध भाजपा के लिए तीन स्तरों पर चुनौती बन सकता है।

पोस्टर में पार्टी के बजाय जिलाध्यक्ष को सीधे जिम्मेदार ठहराया गया है। ऐसे में प्रदेश नेतृत्व के सामने यह संदेश भी जा सकता है कि टिकट वितरण को लेकर स्थानीय संगठन के भीतर संवाद और समन्वय की कमी रही है।

रक्षा भंडारी के सामने असंतोष शांत करने की चुनौती

डॉ. रक्षा भंडारी को जनवरी 2025 में सिरोही भाजपा का जिलाध्यक्ष चुना गया था। नियुक्ति के समय उन्होंने सभी को साथ लेकर संगठन मजबूत करने की बात कही थी।

अब नगर निकाय चुनाव के दौरान सामने आया यह विरोध उनकी संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा बन सकता है। यदि समय रहते संवाद नहीं होता है, तो मामला चुनावी बहिष्कार या निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन तक पहुंच सकता है।

भाजपा और जिलाध्यक्ष का पक्ष आना बाकी

वायरल पोस्टर में लगाए गए आरोपों पर भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी अथवा पार्टी की जिला इकाई का आधिकारिक पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है।

टिकट वितरण में किन समीकरणों और मानदंडों को आधार बनाया गया, इस पर भाजपा की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

सिरोही की राजनीति में नया सामाजिक दबाव

यह विवाद बताता है कि सिरोही जिले में चुनावी लड़ाई केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं है। टिकटों में जातीय-सामाजिक संतुलन और स्थानीय नेतृत्व की स्वीकार्यता भी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है।

अब सबकी नजर आज शाम प्रस्तावित कार्यक्रम पर रहेगी। यदि विरोध में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं, तो यह भाजपा के लिए गंभीर राजनीतिक चेतावनी बन सकता है।

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