सिरोही | नगर परिषद सभापति पद के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रितु जैन के नामांकन को लेकर कई घंटों तक चला राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम समाप्त हो गया है। भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों और कांग्रेस की कानूनी टीम द्वारा प्रस्तुत जवाब पर विचार करने के बाद रितु जैन का नामांकन कायम रहा। इसके साथ ही उनकी उम्मीदवारी को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है।
नामांकन सही पाए जाने की जानकारी सामने आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर दिखाई दी। कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए इसे पार्टी की जीत बताया। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने भी कांग्रेस प्रत्याशी के चुनाव मैदान में बने रहने पर संतोष जताया।
भाजपा ने नामांकन पर दर्ज कराई थीं आपत्तियां
मामले की शुरुआत उस समय हुई, जब भाजपा की ओर से जोधपुर हाईकोर्ट के दो अधिवक्ताओं ने रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष कांग्रेस प्रत्याशी रितु जैन के नामांकन को लेकर आपत्तियां प्रस्तुत कीं।
आपत्तियां दर्ज होने के बाद सिरोही की राजनीति में हलचल तेज हो गई। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की कानूनी एवं राजनीतिक टीमें सक्रिय हो गईं। हालांकि भाजपा की ओर से प्रस्तुत आपत्तियों के विस्तृत कानूनी आधार की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
आपत्तियों के कारण रितु जैन की उम्मीदवारी को लेकर अटकलें शुरू हो गईं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज थी कि उनका नामांकन कायम रहेगा या निर्वाचन अधिकारी की ओर से कोई प्रतिकूल निर्णय आएगा।
कांग्रेस को मिला जवाब देने का समय
रिटर्निंग अधिकारी ने रितु जैन के पक्ष को आपत्तियों का जवाब प्रस्तुत करने के लिए दोपहर 12:30 बजे तक का समय दिया। इसके बाद कांग्रेस की कानूनी टीम ने दस्तावेजों और कानूनी तर्कों के साथ रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखा।
कांग्रेस की ओर से दावा किया गया कि रितु जैन का नामांकन नियमानुसार दाखिल किया गया है और उस पर लगाई गई आपत्तियों में ऐसा कोई आधार नहीं है, जिससे उनकी उम्मीदवारी प्रभावित हो।
इस दौरान दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें रिटर्निंग अधिकारी के निर्णय पर टिकी रहीं। कलेक्ट्रेट परिसर में पूरे समय राजनीतिक सरगर्मी बनी रही।
कलेक्ट्रेट पहुंचे संयम लोढ़ा
नामांकन की जांच और आपत्तियों पर सुनवाई के बीच पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा भी कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके पहुंचने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बढ़ गई। बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं ने पार्टी और रितु जैन के समर्थन में नारेबाजी की।
कांग्रेस नेताओं ने पूरे घटनाक्रम को भाजपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए निष्पक्ष निर्वाचन प्रक्रिया की मांग की। दूसरी ओर भाजपा की ओर से नामांकन की वैधता को लेकर कानूनी आपत्तियां प्रस्तुत करने की बात कही गई।
रिटर्निंग अधिकारी के निर्णय से साफ हुई तस्वीर
दोनों पक्षों के तर्क और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद रितु जैन का नामांकन कायम रहा। इस निर्णय के बाद सभापति चुनाव में उनकी उम्मीदवारी को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो गई।
नामांकन कायम रहने के बाद रितु जैन कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी के रूप में सभापति पद का चुनाव लड़ सकेंगी। भाजपा की ओर से दर्ज आपत्तियों के कारण उनकी उम्मीदवारी पर बना संशय भी दूर हो गया है।
हालांकि निर्वाचन अधिकारी के विस्तृत आदेश और आपत्तियों पर दिए गए कानूनी निष्कर्षों की पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही मामले के तकनीकी पहलुओं की विस्तृत तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह
रितु जैन का नामांकन कायम रहने की खबर मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह नजर आया। कार्यकर्ताओं ने इसे सच्चाई और कानूनी पक्ष की जीत बताते हुए रितु जैन तथा संयम लोढ़ा के समर्थन में नारे लगाए।
नामांकन की जांच के दौरान कांग्रेस खेमे में चिंता का माहौल था, लेकिन निर्णय सामने आने के बाद कार्यकर्ताओं और नेताओं ने राहत की सांस ली। पार्टी नेताओं ने अब पूरा ध्यान सभापति पद के चुनाव और पार्षदों को एकजुट रखने पर केंद्रित करने की बात कही।
संयम लोढ़ा ने भाजपा पर साधा निशाना
रितु जैन का नामांकन कायम रहने के बाद पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने भाजपा पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से चुनाव लड़ रही है और सभापति पद का मुकाबला पूरी मजबूती के साथ लड़ा जाएगा।
लोढ़ा ने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और किसी भी राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नामांकन को लेकर पैदा की गई अनिश्चितता समाप्त हो चुकी है और अब कांग्रेस का पूरा ध्यान चुनावी मुकाबले पर है।
अब पार्षदों के समर्थन पर टिकी नजरें
रितु जैन का नामांकन कायम रहने के बाद सिरोही नगर परिषद सभापति चुनाव की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। अब चुनाव का परिणाम पार्षदों के संख्या बल, उनकी एकजुटता और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर करेगा।
दोनों प्रमुख दल अपने-अपने पार्षदों को साथ रखने और आवश्यक समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में मतदान तक बैठकों, राजनीतिक रणनीति और पार्षदों की बाड़ेबंदी का दौर जारी रह सकता है।
नामांकन पर आपत्तियों का अध्याय समाप्त होने के बाद अब असली मुकाबला सभापति की कुर्सी के लिए होगा। कांग्रेस रितु जैन के साथ चुनाव मैदान में है, जबकि भाजपा भी अपना बोर्ड बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
फिलहाल रितु जैन का नामांकन कायम रहना कांग्रेस के लिए बड़ी राहत है। अब सिरोही की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर परिषद सभापति की कुर्सी पर किसका कब्जा होगा और मतदान के दिन पार्षदों का वास्तविक रुख क्या रहेगा।