राजनीति

सिरोही: क्या जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं का हक खाएंगे कांग्रेस के नए ब्लॉक पदाधिकारी?

गणपत सिंह मांडोली · 11 अगस्त 2026, 02:15 दोपहर
सिरोही में निकाय चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस द्वारा की गई नई ब्लॉक पदाधिकारियों की नियुक्ति ने पार्टी के भीतर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों से सक्रिय पुराने कार्यकर्ताओं में इस फैसले को लेकर असमंजस और नाराजगी है।

सिरोही | नगर निकाय चुनाव की आहट के बीच कांग्रेस संगठन में हुई नई ब्लॉक पदाधिकारी की नियुक्ति को लेकर पार्टी के अंदरखाने में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। नियुक्ति को लेकर जहां नए पदाधिकारियों में उत्साह नजर आ रहा है, वहीं वर्षों से संगठन और जमीन पर सक्रिय रहने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि नगर निकाय चुनाव से ठीक पहले हुई इस नियुक्ति का आखिर राजनीतिक मकसद क्या है? क्या कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने के लिए नए चेहरे को जिम्मेदारी दी है या फिर आगामी निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तहत यह बदलाव किया गया है?

पैराशूट पदाधिकारी या संगठन की नई रणनीति?

कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी है कि जिन लोगों ने वर्षों तक बूथ से लेकर सड़क तक पार्टी के लिए संघर्ष किया, चुनावों में मेहनत की और संगठन को जमीन पर खड़ा रखने में भूमिका निभाई, उनके ऊपर अचानक नए पदाधिकारी को जिम्मेदारी मिलने से कार्यकर्ताओं में असमंजस स्वाभाविक है।

पार्टी के अंदरखाने में कुछ कार्यकर्ता इन्हें "पैराशूट पदाधिकारी" तक कह रहे हैं। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि नए चेहरों को मौका देना संगठन की स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन सवाल यह है कि वर्षों से मेहनत कर रहे कार्यकर्ताओं को इस पूरी कवायद में उनका राजनीतिक सम्मान और उचित भूमिका कब मिलेगी?

निकाय चुनाव और अध्यक्ष पद को लेकर भी कयास

नगर निकाय चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस के नए ब्लॉक पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक कयास भी तेज हो गए हैं। सियासी चर्चा यह भी है कि कहीं इस नियुक्ति के पीछे आगामी निकाय चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाने की कोई बड़ी रणनीति तो नहीं है?

कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ब्लॉक स्तर की संगठनात्मक जिम्मेदारी किसी भी नेता को स्थानीय राजनीति में प्रभाव बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर देती है। ऐसे में नगर पालिका की राजनीति में अध्यक्ष पद से लेकर संगठन और टिकट वितरण तक अपनी भूमिका मजबूत करने की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं।

हालांकि, इन चर्चाओं की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है और कांग्रेस के नए पदाधिकारियों की ओर से भी ऐसी किसी राजनीतिक मंशा को लेकर कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

पुराने कार्यकर्ताओं का सवाल—"हमारा नंबर कब आएगा?"

कांग्रेस के कई पुराने कार्यकर्ताओं के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर संगठन में लगातार नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहेंगी, तो वर्षों से पार्टी के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं का राजनीतिक भविष्य क्या होगा?

कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन केवल पदों से नहीं, बल्कि जमीन पर संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं से मजबूत होता है। ऐसे में नेतृत्व को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नई नियुक्ति के साथ पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की भूमिका भी कमजोर न हो।

फिलहाल नई नियुक्ति ने सिरोही कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ये नियुक्ति केवल संगठनात्मक बदलाव हैं या फिर इनके पीछे निकाय चुनाव की कोई बड़ी सियासी पटकथा भी लिखी जा रही है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि चुनावी मैदान में नए ब्लॉक पदाधिकारी कितना सक्रिय होते हैं और वर्षों से जमीन पर पसीना बहा रहे पुराने कार्यकर्ताओं को पार्टी किस तरह साथ लेकर चलती है।

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