सिरोही | राजस्थान के खेल इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना सामने आई है, जहां सिरोही में माननीय उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश की खुलेआम अवहेलना की गई। सिरोही जिला ओलंपिक संघ का एक समानांतर चुनाव न केवल आयोजित किया गया, बल्कि इसके समाचार भी अखबारों में प्रकाशित हुए और सोशल मीडिया पर बधाइयों के पोस्टर वायरल हो गए।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद सिरोही जिला ओलंपिक संघ के चुनाव से जुड़ा है। आरोप है कि राजस्थान राज्य ओलंपिक संघ के महासचिव सुरेन्द्र गुर्जर ने अवैध तरीके से एक एड-हॉक कमेटी का गठन किया।
इस कमेटी का कन्वीनर भीक सिंह देवड़ा को नियुक्त किया गया, जिन्होंने इस प्रक्रिया में मनमाने ढंग से काम किया।
चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
भीक सिंह देवड़ा पर आरोप है कि उन्होंने स्वयं को ही चुनाव अधिकारी नियुक्त कर लिया। इसके बाद, उन्होंने अपनी ही वोटर लिस्ट जारी की और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी।
इस एकतरफा और मनमानी प्रक्रिया के खिलाफ सिरोही जिला ओलंपिक संघ के वर्तमान वैध अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह चौहान ने कानूनी कदम उठाया।
हाईकोर्ट में विचाराधीन है मामला
जितेंद्र सिंह चौहान ने अपने अधिवक्ता तंवर सिंह के माध्यम से माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में एक याचिका दायर की।
यह मामला सिविल रिट पिटीशन संख्या 19727/2025 के तहत 'जितेंद्र सिंह चौहान बनाम राजस्थान राज्य ओलम्पिक एसोसिएशन' के नाम से दर्ज है और आज भी विचाराधीन है।
न्यायालय का स्थगन आदेश
माननीय न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में एक स्थगन आदेश पारित किया था। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, यह स्थगन आदेश आज तक प्रभावी है।
स्टे के बावजूद चुनाव का आयोजन
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हाईकोर्ट का स्टे जारी रहने के बावजूद 10 अगस्त 2026 को सिरोही जिला ओलंपिक संघ के बैनर तले एक वार्षिक साधारण सभा और चुनाव कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस तथाकथित चुनाव के बाद जारी पोस्टरों और समाचारों में कई पदाधिकारियों के नामों की घोषणा की गई।
इनमें चेयरमैन के रूप में पूर्व भाजपा अध्यक्ष सुरेश कोठारी, मुख्य संरक्षक के तौर पर पूर्व जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया और संरक्षक के रूप में सागरमल अग्रवाल का नाम शामिल है।
अध्यक्ष पद पर भीक सिंह देवड़ा, महासचिव पद पर हरदेव आर्य और कोषाध्यक्ष पद पर महेन्द्र सिंह उमट के नाम की घोषणा की गई। इसके अलावा, संविधान के विपरीत कई अन्य नाम भी जोड़े गए हैं।
यह सीधी-सीधी अदालत की अवमानना है
कानून के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि जब किसी मामले में माननीय हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्रभावी हो, तो उस विषय पर कोई भी गतिविधि करना सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की श्रेणी में आता है।
इस तरह का चुनाव, निर्णय या नई कार्यकारिणी का गठन करना न केवल नेशनल स्पोर्ट्स कोड का उल्लंघन है, बल्कि यह भारतीय ओलंपिक संघ के संविधान के भी खिलाफ है।
खेल जगत में भारी रोष
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस चुनाव प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी थी, उसे आयोजित करने का अधिकार किसने दिया? क्या राजस्थान राज्य ओलंपिक संघ खुद को अदालत से भी ऊपर मानता है?
सिरोही के खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में इस फर्जी चुनाव को लेकर भारी रोष व्याप्त है। वर्तमान अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह चौहान ने इसे अदालत की खुली अवमानना बताते हुए कहा है कि इस घटना ने खेल जगत में भूचाल ला दिया है।
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