सिरोही | 16 अगस्त 2026 श्री क्षत्रिय युवक संघ द्वारा राष्ट्रनायक वीर दुर्गादास राठौड़ जयंती के अवसर पर आयोजित दायित्व बोध पखवाड़े के चौथे दिन सिरोही शहर के महाराव सुरताण राजपूत छात्रावास में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दुर्गादास राठौड़ के जीवन, संघर्ष और कर्तव्यबोध से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।
प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ चंद्रवीर सिंह लूणोल द्वारा प्रार्थना "क्षत्रिय कुल में प्रभु जन्म दिया तो...!" के साथ किया गया। इसके बाद वक्ताओं ने राष्ट्रनायक वीर दुर्गादास राठौड़ के जीवन और उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
दायित्व बोध को जीवन में उतारने का आह्वान
संघ के प्रांतीय विस्तारक वीरबहादुर सिंह असाड़ा ने राष्ट्रनायक वीर दुर्गादास राठौड़ के जीवन से प्रेरणा लेकर दायित्व बोध को अपने जीवन में उतारने की बात कही। उन्होंने कहा कि एक सामान्य राजपूत परिवार में जन्म लेने के बावजूद कर्तव्यबोध के कारण दुर्गादास राठौड़ साधारण से असाधारण व्यक्तित्व बने। मध्यकालीन इतिहास में उनका जीवन इसका अनूठा उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में दोबारा ऐसे चरित्र का निर्माण हो, इसके लिए युवाओं को संघ की शाखाओं और शिविरों के माध्यम से संघ से जुड़ना चाहिए।
दुर्गादास राठौड़ के जीवन और संघर्ष पर चर्चा
कार्यक्रम में डॉ. उदय सिंह डिंगार ने वीर दुर्गादास राठौड़ के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जयंती मनाने की सार्थकता तभी है, जब महापुरुषों के आदर्श और गुण हमारे जीवन में भी आएं।
उन्होंने दुर्गादास राठौड़ की युद्ध प्रणाली और उनके संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि वे बेहद धैर्यशील व्यक्तित्व के धनी थे। लंबे संघर्ष के बावजूद उन्होंने अजीत सिंह को राजगद्दी पर बैठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार
कार्यक्रम में चक्रवर्ती सिंह पालड़ी एम. और सुमेर सिंह उथमण ने भी संबोधित किया। महिपाल सिंह केसुआ ने पूज्य श्री तन सिंह जी द्वारा लिखित 'क्षीप्रा के तीर' निबंध का पठन किया। कार्यक्रम का संचालन अमरसिंह चांदणा ने किया।
सैकड़ों लोग कार्यक्रम में हुए शामिल
जयंती समारोह के इस कार्यक्रम में प्रियवर्धन राडबर, कुलदीप सिंह विरोली, नाहर सिंह जाखड़ी, खुशपाल सिंह उथमण सहित क्षेत्र के प्रबुद्ध जन, युवा और मातृ शक्ति मौजूद रहे। कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।