सिरोही | सिरोही जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे एक बुजुर्ग की ऑपरेशन थिएटर में मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जालौर जिले के सियाणा गांव निवासी 65 वर्षीय इंद्रमल लोहार की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा हुआ।
ऑपरेशन थिएटर में क्या हुआ?
परिजनों ने चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जब मामूली फ्रैक्चर के ऑपरेशन के लिए मरीज को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया था, तो करीब एक घंटे दस मिनट बाद शव बाहर क्यों लाया गया?
आखिर इस दौरान ऑपरेशन थिएटर में क्या हुआ? हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने बताया कि एनेस्थीसिया देने के दौरान मरीज को हार्ट अटैक आया और उन्हें बचाने के प्रयास किए गए।
घटना का विवरण
जालौर जिले के सियाणा निवासी इंद्रमल लोहार 11 अक्टूबर को घर की सीढ़ियों से उतरते समय फिसलकर गिर गए थे। हादसे में उनकी जांघ की हड्डी में फ्रैक्चर हुआ, जिसके बाद परिजन उन्हें उपचार के लिए सिरोही जिला अस्पताल लेकर पहुंचे।
यहां भर्ती कर उनका इलाज शुरू किया गया और ऑपरेशन की तारीख निर्धारित की गई। करीब 11 बजकर 45 मिनट पर इंद्रमल को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया।
परिजनों के मुताबिक, दोपहर करीब 12 बजकर 55 मिनट पर जब उन्हें बाहर लाया गया, तब उनकी मौत हो चुकी थी। परिजनों को बताया गया कि एनेस्थीसिया का इंजेक्शन देने के दौरान उन्हें हार्ट अटैक आया।
परिजनों का आक्रोश
यह जानकारी मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मरीज की हालत अचानक बिगड़ी थी, तो उसे बचाने के लिए क्या प्रयास किए गए और परिजनों को समय पर जानकारी क्यों नहीं दी गई?
मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगते हुए डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। मृतक के पुत्रों ने कहा कि उनके पिता को मामूली फ्रैक्चर था और यदि उन्हें स्थिति की गंभीरता का पहले पता होता, तो वे गुजरात में इलाज करवाने पर विचार करते।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र महात्मा अन्य चिकित्सकों के साथ मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। उन्होंने परिजनों से रिपोर्ट देने को कहा, ताकि मामले में कार्रवाई की जा सके।
प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र महात्मा ने बताया कि मरीज को शुगर और ब्लड प्रेशर की समस्या थी। ऑपरेशन शुरू होने से पहले स्थानीय एनेस्थीसिया देने के लिए सुई लगाते ही उन्हें अटैक आया।
चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया और आईसीयू में भी उपचार दिया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। दूसरी ओर, परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
जांच की मांग
यह मामला केवल एक मरीज की मौत का नहीं, बल्कि अस्पताल में आपात स्थिति के दौरान उपचार, समय पर सूचना और जवाबदेही का भी है। एनेस्थीसिया देने के दौरान मरीज की हालत बिगड़ना एक गंभीर चिकित्सकीय आपातस्थिति हो सकती है।
अब जरूरी है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो, ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू के रिकॉर्ड की समीक्षा की जाए तथा उपचार में अपनाई गई प्रक्रिया स्पष्ट की जाए।
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