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अस्पताल की शर्मनाक मांग: अस्पताल में बीयर की मांग, मासूमों का मेडिकल रोका

बलजीत सिंह शेखावत · 05 जुलाई 2026, 05:21 शाम
सिरोही में यौन शोषण पीड़ित बच्चों की मेडिकल जांच के दौरान अस्पताल स्टाफ ने कथित तौर पर पुलिस से बीयर मांगी। मना करने पर जांच रोक दी गई।

सिरोही | राजस्थान के सिरोही में न्याय की प्रक्रिया पर उस वक्त गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब यौन शोषण पीड़ित मासूमों की मेडिकल जांच के दौरान एक शर्मनाक घटना सामने आई। जिला अस्पताल में चिकित्सक और स्टाफ पर पुलिसकर्मियों से बीयर मांगने का गंभीर आरोप लगा है।

अस्पताल में शर्मनाक घटना

शिकायत के अनुसार, जब पुलिसकर्मी दो पीड़ित बच्चों को लेकर मेडिकल जांच के लिए अस्पताल पहुंचे, तो वहां मौजूद चिकित्सक और स्टाफ ने कथित तौर पर उनसे पूछा, "बारिश का मौसम है… बीयर लेकर आए हो?"

आरोप है कि उन्होंने पुलिसकर्मियों से बीयर की 10 बोतलों की मांग की।

जांच अधूरी छोड़ी

पुलिसकर्मियों द्वारा बीयर लाने से इनकार करने पर, अस्पताल के स्टाफ ने कथित तौर पर बच्चों की मेडिकल जांच को अधूरा छोड़ दिया।

उन्हें अगले दिन सुबह आने के लिए कहकर लौटा दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नशे की हालत में था।

प्राधिकरण ने लिया संज्ञान

यह मामला बाल कल्याण समिति के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सावित्री आनंद निर्भीक तक पहुंचा। उन्होंने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया।

प्राधिकरण सचिव ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पीएमओ डॉ. विरेन्द्र महात्मा और सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी को तलब किया और मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

जांच समिति का गठन

प्राधिकरण के हस्तक्षेप के बाद, पीएमओ ने मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन कर दिया है। इसके साथ ही, दोनों पीड़ित बच्चों की मेडिकल जांच पूरी करा ली गई है।

इस पूरी घटना से जिला कलक्टर को भी अवगत करा दिया गया है ताकि उचित प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

यौन शोषण मामले में हॉस्टल संचालक गिरफ्तार

दूसरी ओर, जिस यौन शोषण मामले में बच्चे पीड़ित थे, उसमें पुलिस ने शनिवार को हॉस्टल संचालक को गिरफ्तार कर लिया है।

इस हॉस्टल में सिरोही, जालोर और बाड़मेर के लगभग 40 बच्चे रहते थे, जो कक्षा 5 से 12 तक के छात्र थे।

पुलिस के अनुसार, अब तक छह में से दो बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है, जिनकी उम्र 10 और 12 वर्ष है।

बिना पंजीकरण चल रहा था हॉस्टल

जिला कलक्टर के निर्देशों के बाद, नगर परिषद ने हॉस्टल को सीज कर दिया है।

नगर परिषद आयुक्त जोधाराम विश्नोई ने जानकारी दी कि यह हॉस्टल बिना किसी पंजीकरण के अवैध रूप से संचालित हो रहा था।

निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि हॉस्टल में बच्चों के लिए पर्याप्त सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था का अभाव था। 40 बच्चों के लिए केवल दो शौचालय थे और परिसर में काफी गंदगी पाई गई।

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