सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में जल जीवन मिशन के तहत एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रेवदर तहसील के धाण गांव में बिना घरों तक पाइप पहुंचाए ही कागजों में 'हर घर जल' का सपना पूरा दिखा दिया गया है।
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी योजना?
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के करीब 70 प्रतिशत घरों में आज भी नल का कनेक्शन नहीं पहुंचा है। इसके बावजूद पंचायत ने बेशर्मी से कार्य पूर्णता का प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
इस धांधली से नाराज ग्रामीणों ने अब जिला कलेक्टर के पास गुहार लगाई है। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में तो गांव प्यासा नहीं है, लेकिन हकीकत में लोग बूंद-बूंद को मोहताज हैं।
मिलीभगत का गंभीर आरोप
ज्ञापन में ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत की बात कही गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि बिना काम पूरा हुए एनओसी देना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
हमारे घरों में नल तक नहीं लगे हैं, फिर पंचायत ने कैसे कह दिया कि सबको पानी मिल रहा है? यह सरासर धोखा है और इसकी जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। जो घर कनेक्शन से वंचित रह गए हैं, उन्हें तुरंत जोड़ा जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष
सिरोही का यह मामला जल जीवन मिशन की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है। अगर कागजों पर ही योजनाएं पूरी होती रहीं, तो धरातલ पर आम आदमी का जीवन कभी नहीं सुधरेगा।
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