सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में नवनिर्मित केंद्रीय विद्यालय के पहले ही सत्र में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विद्यालय प्रशासन पर मनमर्जी से लॉटरी निकालने और चहेतों को प्रवेश देने का गंभीर आरोप लगा है।
भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष महिपालसिंह चारण ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। आरोप है कि प्रवेशोत्सव के दौरान नियमों को ताक पर रखकर बिना वीडियोग्राफी के ही लॉटरी निकाल दी गई, जिससे पारदर्शिता खत्म हो गई।
पारदर्शिता पर उठे सवाल और चहेतों को लाभ का आरोप
सिरोही मुख्यालय पर इसी सत्र से शुरू हो रहे इस विद्यालय में दाखिले के लिए बड़ी संख्या में अभिभावकों ने आवेदन किए थे। लेकिन लॉटरी प्रक्रिया के दौरान अनिवार्य वीडियोग्राफी नहीं की गई, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर काफी रोष व्याप्त है।
महिपालसिंह चारण का कहना है कि इस तरह की अपारदर्शी प्रक्रिया केवल अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अपनाई गई है। उन्होंने इस पूरी लॉटरी को निरस्त कर दोबारा पारदर्शी तरीके से चयन प्रक्रिया आयोजित करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
अभिभावकों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए यह गुप्त तरीका अपनाया गया। यदि प्रक्रिया साफ-सुथरी थी, तो वीडियोग्राफी कराने में प्रशासन को क्या परेशानी थी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
प्रिंसीपल के व्यवहार और सांसद की चुप्पी पर नाराजगी
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने 17 अप्रैल को प्रवेश के संबंध में जानकारी मांगी, तो स्कूल प्रिंसीपल ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने बताया कि वीडियोग्राफी के बारे में पूछने पर प्रिंसीपल भड़क गए और संतोषजनक जवाब देने के बजाय लिस्ट बाहर देखने को कह दिया।
इस मामले में क्षेत्र के सांसद लुम्बाराम चौधरी को भी अवगत कराया गया है, लेकिन 10 दिन बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सांसद विद्यालय की शुरुआत को लेकर काफी उत्साहित थे, लेकिन अब उनकी चुप्पी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
धांधली जैसी कोई बात नहीं है। पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत कमेटी की मौजूदगी में संपन्न हुई है और इसमें पूर्ण पारदर्शिता रखी गई है। लॉटरी के बाद जो लिस्ट आती है उसकी पीडीएफ चस्पा कर दी जाती है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग और भविष्य की चिंता
अभिभावकों का मानना है कि यदि शुरुआत में ही ऐसी अनियमितताएं होंगी, तो विद्यालय की साख और बच्चों के भविष्य पर बुरा असर पड़ेगा। जिला कलेक्टर रोहिताश्वसिंह तोमर को दिए ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
फिलहाल, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन इस मामले को सुलझाने की कोशिश में है, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सिरोही की जनता अब कलेक्टर के फैसले और सांसद के हस्तक्षेप का इंतजार कर रही है ताकि योग्य बच्चों को प्रवेश मिल सके।
यह विवाद अब राजनीतिक मोड़ ले चुका है, जहां एक ओर सत्ता पक्ष के नेता कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन नियमों का हवाला दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन इस लॉटरी को रद्द कर दोबारा निष्पक्ष जांच का आदेश देता है।
सिरोही के इस नए केंद्रीय विद्यालय से क्षेत्र के लोगों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन पहले ही कदम पर विवाद ने सबको चौंका दिया है। अभिभावक अब उच्च अधिकारियों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं ताकि शिक्षा के मंदिर में पक्षपात न हो।
अंततः, इस मामले की गहराई से जांच ही सच सामने ला पाएगी और यह तय करेगी कि प्रवेश प्रक्रिया में कोई खेल हुआ है या नहीं। स्थानीय समुदाय की मांग है कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता सर्वोपरि होनी चाहिए।
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