राजस्थान

सिरोही: नए कोर्ट भवन की जगह पर विवाद, वकीलों ने खोला मोर्चा

बलजीत सिंह शेखावत · 06 जून 2026, 02:32 दोपहर
बार एसोसिएशन ने राजपुरा में भूमि आवंटन का विरोध किया, सरूपविलास परिसर को बताया सबसे उपयुक्त स्थान।

सिरोही | दी डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन सिरोही ने नए न्यायालय भवन के लिए प्रस्तावित भूमि आवंटन पर कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन ने एक बैठक आयोजित कर राजपुरा (बाल्दा) में भूमि आवंटन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया और वर्तमान सरूपविलास परिसर में ही भवन निर्माण की मांग की है।

नए कोर्ट भवन पर क्यों छिड़ा विवाद?

शनिवार को वकील मंडल हॉल में अध्यक्ष भंवरसिंह देवड़ा की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा नए न्यायालय भवन के लिए भूमि आवंटन का मुद्दा था। वकीलों ने प्रस्तावित राजपुरा स्थल को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं।

एसोसिएशन का मानना है कि राजपुरा (बाल्दा) क्षेत्र सिरोही मुख्यालय से बहुत दूर है। इसके अलावा, यह एक दुर्घटना-संभावित क्षेत्र है, जहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं।

असुविधा और सुरक्षा की चिंता

अध्यक्ष भंवरसिंह देवड़ा ने बताया कि न्यायालय तक पहुंचने के लिए वकीलों और आम जनता को एक बाहरी घाटे से गुजरना होगा। यह मार्ग सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस दूरी और जोखिम के कारण वादियों, गवाहों और अधिवक्ताओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

सरूपविलास परिसर ही क्यों है पहली पसंद?

इसके विपरीत, बार एसोसिएशन ने सरूपविलास परिसर को ही नए भवन के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना है। यह परिसर शहर के केंद्र में स्थित है और सभी के लिए आसानी से सुलभ है।

अध्यक्ष भंवरसिंह देवड़ा ने बताया, "वर्तमान में सरूपविलास परिसर में न्यायिक कार्य संचालित हो रहे हैं। यहां और इसके आसपास करीब 40-45 सरकारी कार्यालय और न्यायालय हैं, जो इसे आमजन, अधिवक्ताओं और गरीब तबके के लिए आवागमन की दृष्टि से सबसे उपयुक्त स्थान बनाता है।"

इस परिसर में पहले से ही न्यायिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र होने के कारण, यहां नया भवन बनाना तार्किक और सुविधाजनक होगा।

सर्वसम्मति से पारित हुआ प्रस्ताव

बैठक में उपस्थित सभी अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से सरूपविलास परिसर में ही भूमि आवंटन का प्रस्ताव पारित किया। साथ ही, राजपुरा (बाल्दा) में भूमि आवंटन का पुरजोर विरोध करते हुए एक विरोध प्रस्ताव भी पारित किया गया।

एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस मुद्दे को लेकर जल्द ही सरकार, राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति और विधि मंत्री को भी अवगत कराया जाएगा ताकि आमजन के हितों की रक्षा हो सके।

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