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Sirohi: समय, सम-हर्ष एवं साधन का सही उपयोग हो: आचार्य तपोरत्नसूरी

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आचार्य पिंडवाड़ा में गुरुमंदिर के जैन उपासरे में भक्तों को जीवन कैसे जीना विषय पर मार्गदर्शन कर रहे थे। आचार्य ने कहा कि मनुष्य के जीवन में ही मित्रता और प्रयत्न दोनों ही हैं। अब हमें यह समझना है कि हमें किस वक्त क्या काम कैसे करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी फील्ड में कमी निकालना तो बड़ा आसान है, लेकिन खुद का जीवन कैस

sirohi manindar singh bitta news about religious tour of sirohi rajasthan

सिरोही। जैनाचार्य तपोरत्नसूरीजी ने बताया कि भगवान ने हर व्यक्ति को समय, सम-हर्ष एवं साधन दिए हैं। अब यह व्यक्ति पर निर्भर है कि वो इन तीनों का सकारात्मक उपयोग करता है या नकारात्मक। इनका सकारात्मक उपयोग करेगा तो उसका जीवन सहज हो जाएगा और नकारात्मक उपयोग करेगा तो उसका जीवन कठिन हो जाएगा।

आचार्य पिंडवाड़ा में गुरुमंदिर के जैन उपासरे में भक्तों को जीवन कैसे जीना विषय पर मार्गदर्शन कर रहे थे। आचार्य ने कहा कि मनुष्य के जीवन में ही मित्रता और प्रयत्न दोनों ही हैं। अब हमें यह समझना है कि हमें किस वक्त क्या काम कैसे करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी फील्ड में कमी निकालना तो बड़ा आसान है, लेकिन खुद का जीवन कैसे अच्छा बने उस पर हम गंभीरता से नहीं सोचते हैं। कमी निकालने की आदत को भूलकर हमें आगे बढ़ना है।

प्रवचन में उपस्थित आतंकवादी निरोधी मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम. एस. बिट्टा ने आचार्य भगवंत को वंदन कर यह कहा कि आचार्यश्री मुक्ति दे-शक्ति की एकता व अखंडता के लिए एवं मानवता की सेवा का आशीर्वाद प्रदान करें ताकि मैं मेरे बचे हुए जीवन में यह काम और मुस्तेदी से कर सकूं। बिट्टा ने कहा कि जैन धर्म का मूल मंत्र है “जियो और जीने दो” तथा अहिंसा परमोधर्म है। इसी मंत्र के आधार पर जैन धर्म में त्याग, तपस्या, करुणा एवं मैत्री भावना कूट-उच्चयकूट कर भरी हुई हैं। किसी के साथ पक्षपात या धोखाधड़ी नहीं करना और सबके साथ मैत्रीभाव रखने की बात हर व्यक्ति समझ ले और उसे अंगीकार कर ले तो देश में अमन चैन हमेशा कायम रहेगा और भाईचारा मजबूत होगा।

बिट्टा ने नांदिया जैन मंदिर में भगवान महावीर के उस स्थल का दर्शन किए जहाँ पर भगवान महावीर को सर्प ने डसा था। यह स्थल एक पहाड़ पर बना है। वहाँ से वे आरासना अम्बाजी मंदिर पहुंच कर मथा टेक कर देश में अमन चैन की प्रार्थना की। आरासना वो स्थल है जहाँ अम्बामाता का मन्दिर नहीं बनाया गया है बल्कि माता खुद प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई हैं।

बिट्टा ने बामणवाड़ा जैन तीर्थ में भगवान महावीर स्वामी के प्राचीन मंदिर में दर्शन-पूजन कर शांति की प्रार्थना की और उस स्थल को देखा जहाँ पर “भगवान महावीर को साधना के वक्त ग्वालो ने कानो में किले ठोके थे।”

बिट्टा ने सिरोही के आराध्य देव श्री सारणेश्वर महादेव मंदिर की परिक्रमा कर दर्शन किए और वहां उपस्थित पंडितों ने मंत्रोच्चारण के साथ पूजा करवाई। पुजारी आनंद रावल ने बिट्टा का स्वागत करते हुए इस प्राचीन तीर्थ के इतिहास से उनसे अवगत कराया।

बिट्टा ने केसर विलास में सिरोही के पूर्व महाराजा पद्मश्री रघुवीर सिंह देवड़ा व युवराज इंद्रेश्वर सिंह देवड़ा से मुलाकात कर “सिरोही राज्य” के इतिहास के बारे में जानकारी हासिल की। युवराज ने बिट्टा को गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया और केसर विलास व सिरोही राजमहल के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने जैन वीसी में आचार्य धुरन्धरसूरीजी एवं अन्य आचार्य भगवंतो से मिलकर आशीर्वाद लिया। 

बिट्‌टा ने 9वीं-10वीं शताब्दी के प्राचीन जैन तीर्थ "हमीरपुर पार्श्वनाथ" भगवान के दर्शन किए और प्राचीन तीर्थ में दियाणा में उपधान करवा रहे साधु-साध्वियों से मिलकर उनके तप की सुख-शांति पूछी। उन्होंने नितोडा में "बाबाजी महाराज" के दर्शन कर भारत के तेजी से आगे बढ़ने की कामना की।

उन्होंने पावापुरी तीर्थ में भगवान पार्श्वनाथके दर्शन किए और जीरावला तीर्थ में आरती का लाभ लिया। और पार्श्वनाथ दादा से देश में शांति की कामना की। दो दिवसीय मारवाड़ दौरे के बाद वे पुनः दिल्ली लौट गए। उनके साथ पावापुरी ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी महावीर जैन और जोधपुर के उनके मित्र दिनेश जैन थे।

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