सिरोही | नगर परिषद चुनाव के परिणाम सामने आने के साथ ही अब सिरोही में अगली सियासी जंग सभापति की कुर्सी को लेकर शुरू हो गई है। नगर परिषद में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस की ओर से सभापति पद के लिए किस नाम पर मुहर लगती है। माना जा रहा है कि पूर्व विधायक एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संयम लोढ़ा सभापति पद के उम्मीदवार के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सभापति पद की संभावित दावेदारों में रितु जैन और तारा प्रजापति के नाम चर्चा में हैं। रितु जैन कांग्रेस नगर अध्यक्ष पुनीत जैन की पत्नी हैं और शहर के प्रतिष्ठित धनासेठ परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वहीं तारा प्रजापति, कांग्रेस नेता प्रकाश प्रजापति की पत्नी हैं और सामान्य परिवार से आने वाली महिला के रूप में उनकी पहचान है।
तारा प्रजापति के नाम के पीछे क्या है राजनीतिक आधार?
तारा प्रजापति की दावेदारी को सिर्फ पारिवारिक राजनीतिक पहचान के बजाय उनके पति प्रकाश प्रजापति के लंबे सामाजिक और राजनीतिक जुड़ाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रकाश प्रजापति पिछले करीब 27 वर्षों से सिरोही में समाजसेवा से जुड़े हुए हैं। समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें जिला कलेक्टर स्तर पर जिला एवं राज्य स्तर पर पांच बार सम्मानित किया जा चुका है। शहर में लगातार सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहने के कारण उनकी पहचान विभिन्न वर्गों में व्यवहारिक और सम्मानित व्यक्ति के रूप में बताई जाती है।
करीब 17 वर्ष पूर्व निर्दलीय चुनाव जीतकर वे नगर परिषद में उपसभापति भी रह चुके हैं। इसके बाद से वे लगातार संयम लोढ़ा के साथ राजनीतिक रूप से जुड़े रहे हैं। समर्थकों के अनुसार पिछले करीब 17 वर्षों में वे संयम लोढ़ा के साथ लगातार सक्रिय रहे हैं और संगठन से लेकर चुनावी गतिविधियों तक में उनकी भूमिका रही है।
प्रकाश प्रजापति नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और OBC वर्ग से आते हैं। कांग्रेस से जुड़े होने के बावजूद उनके भाजपा कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न समाजों और 36 कौम में व्यक्तिगत एवं व्यवहारिक संबंध होने की बात कही जाती है।
विधानसभा के समीकरण भी बन सकते हैं निर्णायक
सभापति पद के चयन में सिर्फ नगर परिषद के भीतर का राजनीतिक समीकरण ही नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए जातीय और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
प्रजापति समाज के मतदाता सिरोही विधानसभा क्षेत्र में चुनावी गणित में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि कांग्रेस नेतृत्व सभापति का चयन करते समय नगर परिषद की राजनीति के साथ विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरण को कितना महत्व देता है।
एक तरफ रितु जैन के पक्ष में शहर के मजबूत कारोबारी एवं धनासेठ परिवार की पृष्ठभूमि है, तो दूसरी तरफ तारा प्रजापति के नाम के साथ लंबे सामाजिक जुड़ाव, OBC समीकरण, राजनीतिक अनुभव और विभिन्न वर्गों में व्यक्तिगत संपर्क का आधार सामने रखा जा रहा है।
अब फैसला संयम लोढ़ा के पाले में
कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद सभापति का चुनाव पार्टी के लिए केवल नगर परिषद का पद भर नहीं रह गया है। यह चयन आने वाले समय में सिरोही की कांग्रेस की राजनीति और विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सभापति की कुर्सी धनासेठ परिवार की राजनीतिक पहुंच को मिलेगी, या कांग्रेस आगामी विधानसभा के जातीय-सामाजिक समीकरणों को साधते हुए तारा प्रजापति के नाम पर दांव लगाएगी?
आज सभापति पद के चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी होने की संभावना है, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत कल तक सभापति पद के उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इसके साथ ही सिरोही की सियासत में सभापति पद की तस्वीर भी काफी हद तक साफ हो जाएगी।
*Edit with Google AI Studio