सिरोही |नगर निकाय चुनाव में पार्षद पद के प्रत्याशियों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने कड़े नियम लागू कर दिए हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, निकाय में किसी भी प्रकार का वित्तीय हित रखने वाले उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माने जाएंगे।
आयोग का यह कदम चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नामांकन रद्द होने के मुख्य कारण
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24 और राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) नियम, 1994 के तहत स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
यदि कोई प्रत्याशी स्वयं, अपनी पार्टनरशिप फर्म, किसी रिश्तेदार या कर्मचारी के माध्यम से निकाय के किसी भी ठेके, निर्माण कार्य या अन्य अनुबंध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हित रखता है, तो उसका नामांकन पत्र संवीक्षा के दौरान निरस्त किया जा सकता है।
आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार
नामांकन पत्रों की जांच के दौरान पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए आम नागरिकों को भी अधिकार दिया गया है।
संबंधित वार्ड का कोई भी नागरिक या प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार, किसी प्रत्याशी के खिलाफ पुख्ता दस्तावेजों और सबूतों के साथ रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष लिखित में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो रिटर्निंग अधिकारी को नियमानुसार नामांकन रद्द करने का पूरा अधिकार होगा।
ये भी हैं अयोग्यता के आधार
वित्तीय हितों के अलावा, कई अन्य मानक भी तय किए गए हैं जिनके आधार पर किसी प्रत्याशी का नामांकन खारिज हो सकता है।
- संवीक्षा की तिथि तक प्रत्याशी की आयु 21 वर्ष पूरी नहीं होना।
- नामांकन पत्र के साथ निर्धारित प्रारूप में शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं करना।
- घर में कार्यशील शौचालय होने संबंधी स्व-घोषणा पत्र संलग्न नहीं करना।
- किसी अपराध में 6 माह या उससे अधिक की सजा काट चुका व्यक्ति।
- सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का दोषी पाया गया व्यक्ति।
नगर निकाय चुनाव में नामांकन प्रक्रिया के बीच आयोग के इन सख्त प्रावधानों से संभावित प्रत्याशियों में हलचल बढ़ गई है। अब सभी की नजरें संवीक्षा के दौरान आने वाली आपत्तियों और उनके समर्थन में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों पर टिकी रहेंगी।