सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले के रेवदर थाना क्षेत्र में घटित एक सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। दांतराई के पास अनापुर के जंगलों में हुई इस वारदात के बाद अब एक परिवार पूरी तरह बिखर चुका है।
जंगल में मिला था अंशी देवी का शव
कुछ दिन पहले रेवदर पुलिस को सूचना मिली थी कि दांतराई के पास जंगल में एक महिला का शव पड़ा है।
सूचना पाकर पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू की।
शव की शिनाख्त अंशी देवी पत्नी दिनेश कुमार हीरागर के रूप में हुई, जो तातोल गांव की निवासी थी।
इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और ग्रामीणों ने पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की थी।
पुत्र ने पिता के खिलाफ दर्ज कराया मामला
पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि अंशी देवी की हत्या के पीछे उसके ही पति दिनेश कुमार का हाथ था।
मृतका के पुत्र ने पुलिस को दी गई रिपोर्ट में अपने पिता और कुछ अन्य लोगों को नामजद किया था।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि पारिवारिक विवाद के चलते दिनेश ने अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी।
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया, लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी का कोई सुराग नहीं है।
डर के साये में जीने को मजबूर बच्चे
आरोपी पिता की गिरफ्तारी नहीं होने से मृतका के दोनों पुत्र गहरे सदमे और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं।
परिजनों का दावा है कि आरोपी खुलेआम घूम रहा है और परिवार के सदस्यों को लगातार डरा-धमका रहा है।
जान बचाने के लिए दोनों पुत्र और उनकी पत्नियां अपना पुश्तैनी घर छोड़कर जालौर जिले के झाक गांव चले गए हैं।
वे अब अपने ननिहाल में शरण लिए हुए हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि उनका पिता उन पर भी हमला कर सकता है।
आर्थिक तंगी और टूटता परिवार
इस जघन्य हत्याकांड ने परिवार को न केवल भावनात्मक रूप से, बल्कि आर्थिक रूप से भी तोड़कर रख दिया है।
परिजनों का आरोप है कि आरोपी ने घर पर ताला लगा दिया है और संयुक्त खाते से सारे पैसे निकाल लिए हैं।
मृतका के पिता छगनलाल ने बताया कि मजदूरी कर जमा किए गए पैसे अब आरोपी के पास हैं।
अब परिवार के पास खाने-पीने और बच्चों की देखभाल के लिए पर्याप्त संसाधन भी नहीं बचे हैं।
न्याय की गुहार और आंदोलन की चेतावनी
मृतका के पिता छगनलाल ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपना दुख व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की हत्या के बाद अब नातियों की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर आ गई है।
पुलिस की ओर से केवल आश्वासन मिलने के कारण परिजनों में अब भारी रोष और आक्रोश व्याप्त है।
“मेरी मां की हत्या का आरोपी मेरा पिता खुलेआम घूम रहा है। हमें अपनी जान का खतरा है, लेकिन पुलिस अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर रही।” — कैलाश कुमार, मृतका का पुत्र
परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी को जल्द नहीं पकड़ा गया, तो वे जिला मुख्यालय पर धरना देंगे।
वे भूख हड़ताल पर बैठने की भी योजना बना रहे हैं ताकि प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से ले सके।
निष्कर्ष: न्याय का इंतजार
यह मामला राजस्थान में बढ़ती आपराधिक घटनाओं और पुलिस की धीमी जांच प्रक्रिया का एक ज्वलंत उदाहरण बन गया है।
जब तक आरोपी पुलिस की पहुंच से बाहर है, तब तक पीड़ित परिवार का सामान्य जीवन जीना असंभव है।
अब देखना यह होगा कि सिरोही पुलिस इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई कर आरोपी को सलाखों के पीछे भेजती है।
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