सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में नेशनल हाईवे 62 पर हुए सनसनीखेज नरेन्द्रसिंह देवड़ा उर्फ चिन्टूसिंह हत्याकांड का पुलिस ने सफलतापूर्वक पर्दाफाश कर दिया है। इस जघन्य अपराध में शामिल एक सक्रिय आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
खौफनाक रात की पूरी कहानी
मृतक नरेन्द्र सिंह ने अपनी मौत से पहले सुमेरपुर के संजीवनी अस्पताल में पुलिस को दिए बयान में उस खौफनाक रात का मंजर बयां किया था। घटना 7 मई 2026 की है, जब वह अपने कुएं पर आराम कर रहे थे।
रात के करीब 11 बजे श्रीपालसिंह और नरेन्द्रसिंह अणगौर ने मृतक से उन्हें घर छोड़ने का अनुरोध किया। नरेन्द्र सिंह अपनी गाड़ी (RJ 24 UA 3496) से उन्हें छोड़ने के लिए अणगौर की तरफ रवाना हुए थे।
तभी वेरा रामपुरा के पास शराब की दुकान के सामने एक कैम्पर और स्कॉर्पियो गाड़ी ने उनका रास्ता रोक लिया। इन गाड़ियों में अरविन्दकरण सिंह देवड़ा अपने 12 से 13 साथियों के साथ हथियारों से लैस होकर सवार था।
बर्बर हमला और दर्दनाक अंत
हमलावरों ने गाड़ी रुकते ही नरेन्द्र सिंह पर लाठियों, सरियों और लोहे के पाइपों से हमला बोल दिया। हमला इतना बर्बर था कि नरेन्द्र के दोनों हाथ और पैर बुरी तरह टूट गए और वह लहूलुहान होकर बेहोश हो गए।
गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 12 मई 2026 को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना के बाद पुलिस ने मामले में हत्या की धारा 103 (1) बीएनएस जोड़कर जांच तेज की।
पैसों के विवाद में खूनी रंजिश
पुलिस के गहन अनुसंधान में यह बात सामने आई कि मृतक नरेन्द्र सिंह और मुख्य फरार आरोपी अरविन्दकरण सिंह देवड़ा के बीच काफी गहरी दोस्ती थी। लेकिन बीते कुछ समय से उनके बीच पैसों के लेनदेन को लेकर अनबन चल रही थी।
घटना की रात फोन पर पुरानी बातों को लेकर दोनों के बीच तीखी तकरार हुई थी। नरेन्द्र सिंह केवल बातचीत के जरिए मसला सुलझाना चाहता था, लेकिन आपराधिक प्रवृत्ति के अरविन्दकरण ने जानलेवा साजिश रच डाली थी।
आरोपी ने फोन पर हुई बहस के महज एक घंटे के भीतर अपने गुर्गों को इकट्ठा किया और हाईवे पर घात लगाकर हमला किया। इस दोस्ती का अंत इतना खौफनाक होगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
गिरफ्तारी और आरोपी का इतिहास
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोमपालसिंह उर्फ जसवन्तसिंह को गिरफ्तार किया है। वह बाड़मेर का निवासी है और फिलहाल एक दिन के पुलिस रिमांड पर है। पुलिस उससे अन्य साथियों के बारे में पूछताछ कर रही है।
वहीं, मुख्य आरोपी अरविन्दकरण सिंह देवड़ा अभी फरार है। पुलिस के अनुसार, अरविन्दकरण का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। वह साल 2020 में फालना के कानसिंह रावणा राजपूत की सुपारी लेकर हत्या करवाने के मामले में भी नामजद है।
पुलिस की विशेष टीम का गठन
जिला पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शिवगंज थानाधिकारी बाबूलाल राणा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया था। टीम में प्रेम सिंह, सदाराम और अन्य अनुभवी पुलिसकर्मी शामिल हैं।
मोबाइल इन्वेस्टिगेशन यूनिट और एफएसएल की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया था। पुलिस की टीमें अब फरार मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं और जल्द सफलता का दावा कर रही हैं।
पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा, "अपराधियों के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। नरेन्द्र सिंह हत्याकांड के सभी दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।"
इस हत्याकांड ने पूरे जिले में कानून-व्यवस्था और आपसी रंजिशों को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस अब हाईवे पर सुरक्षा गश्त बढ़ाने और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए विशेष रणनीति तैयार कर रहे हैं।
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