राजस्थान

सिरोही का अनोखा सरस्वती मंदिर: राजस्थान के सिरोही में मां शारदा का अनोखा मंदिर, जहां मिठाई नहीं बल्कि पेन और कॉपी चढ़ाने से मिलती है अपार बुद्धि

thinQ360 · 04 अप्रैल 2026, 04:53 दोपहर
राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित मार्कंडेश्वर धाम एक ऐसा पवित्र स्थान है जहां मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए भक्त मिठाई के बजाय पेन और कॉपियां चढ़ाते हैं। मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने से बच्चों की बुद्धि और वाणी में सुधार होता है।

सिरोही | राजस्थान की वीर भूमि अपने किलों और महलों के साथ-साथ अपने अनूठे मंदिरों के लिए भी दुनिया भर में जानी जाती है। यहां की लोक संस्कृति में देवी-देवताओं के प्रति अटूट विश्वास झलकता है।

सिरोही जिले के पिंडवाड़ा क्षेत्र में एक ऐसा ही अद्भुत मंदिर स्थित है, जो शिक्षा और ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। इस मंदिर की चर्चा आज पूरे देश में हो रही है।

आमतौर पर भक्त मंदिरों में फल, फूल और मिठाइयां लेकर जाते हैं। लेकिन सिरोही के आजारी गांव में स्थित मार्कंडेश्वर धाम की परंपरा कुछ अलग ही संदेश देती है।

यहां मां सरस्वती के चरणों में मिठाई का भोग नहीं लगाया जाता। भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर मां को पेन, पेंसिल और कॉपियां भेंट करते हैं। यह सुनकर शायद आपको हैरानी हो, लेकिन यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

शिक्षा की देवी का अनोखा दरबार

मार्कंडेश्वर धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और शिक्षा का संगम है। यहां आने वाले अधिकांश श्रद्धालु छात्र या उनके अभिभावक होते हैं।

मान्यता है कि यदि कोई छात्र पढ़ाई में कमजोर है या उसकी वाणी में दोष है, तो यहां मन्नत मांगने से उसे लाभ मिलता है। मां शारदा की कृपा से बुद्धि तीव्र होती है।

जब छात्रों की मन्नत पूरी हो जाती है, तो वे अपनी श्रद्धा अनुसार स्टेशनरी का सामान चढ़ाते हैं। इनमें रंग-बिरंगी कॉपियां और महंगे पेन भी शामिल होते हैं।

यह परंपरा बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि जगाने का एक मनोवैज्ञानिक तरीका भी मानी जाती है। छात्र अपनी सफलता का श्रेय मां सरस्वती के आशीर्वाद को देते हैं।

महर्षि मार्कंडेय की तपोभूमि

इस पावन धाम का संबंध पौराणिक काल से है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह भूमि महान महर्षि मार्कंडेय की पवित्र तपोस्थली रही है।

महर्षि मार्कंडेय ने इसी स्थान पर बैठकर मां सरस्वती की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने उन्हें ज्ञान और विद्या का वरदान दिया था।

यही कारण है कि इस स्थान को अत्यंत पवित्र माना जाता है। मंदिर का इतिहास गुप्त काल से जुड़ा हुआ है, जो इसकी प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है।

मंदिर की बनावट और गया कुंड

मंदिर परिसर एक ऊंची और मजबूत सुरक्षा दीवार के भीतर बना हुआ है। इसके अंदर प्रवेश करते ही शांति और आध्यात्मिकता का गहरा अनुभव होता है।

परिसर में भगवान विष्णु और मां सरस्वती की बेहद सुंदर और छोटी प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन मूर्तियों की कलात्मकता आज भी भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

मंदिर के ठीक पास एक पवित्र तालाब है जिसे 'गया कुंड' कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस कुंड का विशेष महत्व माना गया है।

लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां अस्थि विसर्जन करने आते हैं। इसे स्थानीय स्तर पर राजस्थान के 'गया' के रूप में भी सम्मान प्राप्त है।

बसंत पंचमी पर उमड़ता है जनसैलाब

वैसे तो यहां साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन बसंत पंचमी का दिन यहां के लिए सबसे बड़ा वार्षिक उत्सव होता है।

माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को छात्र और कलाकार यहां विशेष पूजा करते हैं। इस दिन पूरे मंदिर को पीले फूलों से सजाया जाता है।

मान्यता है कि इस दिन शिक्षा की शुरुआत करने से मां सरस्वती का आशीर्वाद हमेशा साथ रहता है। छोटे बच्चे अपनी पहली कलम यहीं मां को समर्पित करते हैं।

जरूरतमंदों की मदद का जरिया

मंदिर में चढ़ाई गई स्टेशनरी का सदुपयोग भी बहुत ही सुंदर तरीके से किया जाता है। मंदिर प्रबंधन इन कॉपियों और पेन को संभाल कर रखता है।

बाद में इन्हें उन गरीब और जरूरतमंद बच्चों में वितरित कर दिया जाता है, जो संसाधन न होने के कारण पढ़ाई नहीं कर पाते।

इस तरह मां शारदा का यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि समाज में शिक्षा की अलख जगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कैसे पहुंचें मार्कंडेश्वर धाम?

यदि आप इस अद्भुत मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो यह सिरोही शहर से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आजारी गांव से इसकी दूरी मात्र 2 किलोमीटर है।

यदि आप पिंडवाड़ा से आबूरोड की ओर यात्रा कर रहे हैं, तो मुख्य शहर से 5 किलोमीटर दक्षिण में यह धाम स्थित है। सड़क मार्ग से यहां पहुंचना बेहद आसान है।

हर साल हजारों पर्यटक और श्रद्धालु यहां की शांति और दिव्यता का अनुभव करने आते हैं। यह स्थान आस्था और ज्ञान का एक अनुपम उदाहरण पेश करता है।

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