सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित प्रसिद्ध रामझरोखा मंदिर की भूमि के पट्टे को लेकर सियासी पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने इस मामले में प्रदेश सरकार के मंत्री पर तीखा हमला बोला है।
मंत्री और उनके पुत्र पर गंभीर आरोप
संयम लोढ़ा ने भाजपा सरकार के कद्दावर मंत्री ओटाराम देवासी और उनके पुत्र पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। लोढ़ा का दावा है कि मंदिर की जमीन का पट्टा नियमों को ताक पर रखकर जारी किया गया है।उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक 'बेनामी' सौदा है। इसमें कागजों पर नाम किसी और का दर्ज है, जबकि पर्दे के पीछे से इसका वास्तविक लाभ प्रभावशाली लोग उठा रहे हैं। लोढ़ा ने इसे जनता के साथ धोखा बताया है।
जांच की निष्पक्षता पर सवाल
लोढ़ा ने वर्तमान में चल रही जांच को महज एक 'दिखावा' और 'खानापूर्ति' करार दिया है। उनका कहना है कि विभाग और प्रशासन मंत्री के दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे सच्चाई सामने नहीं आ पा रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा सके। लोढ़ा ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।
जयपुर तक जाएगी यह लड़ाई
पूर्व विधायक ने साफ कर दिया है कि वे इस मामले को दबने नहीं देंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सिरोही में न्याय नहीं मिला, तो वे इस पूरे प्रकरण को जयपुर में बड़े मंच पर उठाएंगे।उनका कहना है कि आस्था के केंद्र और मंदिर की भूमि की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। वे इस लड़ाई को कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
जनता की अदालत में मामला
संयम लोढ़ा ने स्थानीय जनता से भी सीधा और भावुक सवाल किया है। उन्होंने पूछा कि जो लोग राम के नाम पर राजनीति करते हैं, क्या वे अब राम मंदिर की भूमि को बचाने के लिए मुखर होकर सामने आएंगे?
क्या बोले मंत्री ओटाराम देवासी?
इस पूरे विवाद और गंभीर आरोपों के बाद अब सबकी नजरें मंत्री ओटाराम देवासी पर टिकी हैं। अभी तक उनकी ओर से इन आरोपों पर कोई ठोस स्पष्टीकरण या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।सिरोही की राजनीति में यह मुद्दा अब आस्था बनाम भ्रष्टाचार की जंग बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस राजनीतिक उठापटक का ऊंट किस करवट बैठता है।