जयपुर | राजधानी के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में छात्र नेता शुभम रेवाड़ का आंदोलन एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। अपनी मांगों को लेकर पिछले 13 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे शुभम ने अपना रुख और सख्त कर लिया है।
अन्न का त्याग कर चुके शुभम ने मंगलवार को जल का भी पूर्ण रूप से त्याग कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने किसी भी प्रकार का मेडिकल ट्रीटमेंट लेने से भी साफ इनकार कर दिया है, जिससे स्थिति चिंताजनक हो गई है।
इलाज से इनकार, वाइटल्स गिरने की आशंका
एसएमएस अस्पताल में भर्ती शुभम रेवाड़ को डॉक्टरों की सघन निगरानी में रखा गया था। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, 13 दिनों से भूखे रहने के कारण उनके शरीर में भारी कमजोरी आ गई है।
अब तक उन्हें आवश्यक फ्लूइड्स (ड्रिप) के जरिए स्थिर रखने का प्रयास किया जा रहा था। लेकिन अब उन्होंने ड्रिप हटवा दी है और किसी भी जीवन रक्षक उपचार या जांच से मना कर दिया है।
चिकित्सकों ने जताई चिंता
चिकित्सकों का कहना है कि जल त्यागने और इलाज से इनकार करने के बाद स्थिति किसी भी वक्त 'क्रिटिकल' हो सकती है। ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल के तेजी से गिरने का खतरा बना हुआ है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
सरकार को सीधी चेतावनी: "अब आर-पार की लड़ाई"
अस्पताल के बेड से ही छात्र नेता ने राज्य सरकार और प्रशासन को सीधी चेतावनी दी है। शुभम का स्पष्ट कहना है कि सरकार लगातार छात्रों की जायज मांगों की अनदेखी कर रही है।
उन्होंने ऐलान किया है कि उनकी यह लड़ाई अब आर-पार की है। जब तक उनकी मांगें धरातल पर पूरी नहीं की जातीं, वे इलाज और पानी दोनों का पूर्ण बहिष्कार रखेंगे।
समर्थकों में रोष, अस्पताल छावनी में तब्दील
शुभम के 'जल त्याग' और इलाज रोकने की खबर फैलते ही उनके समर्थकों और छात्र समुदाय में भारी उबाल आ गया। एसएमएस अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में छात्र एकत्रित हो गए हैं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि शुभम के स्वास्थ्य के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार और प्रशासन की होगी।
हालात की गंभीरता को देखते हुए एसएमएस अस्पताल परिसर और उसके आस-पास भारी पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया गया है। हर गुजरता घंटा अब बेहद अहम माना जा रहा है।
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