सोजत | निकटवर्ती केलवाज ग्राम पंचायत में गोचर भूमि पर पिछले दो वर्षों से अवैध रूप से एक डामर प्लांट संचालित होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि नियमों को ताक पर रखकर यह सब किया जा रहा है।
प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा अवैध प्लांट?
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और सरपंच ने मिलीभगत कर एक सड़क निर्माण ठेकेदार को यह जमीन दे दी। पंचायत की ओर से इसके लिए बाकायदा एक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी जारी किया गया है।
यह सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है, क्योंकि गोचर भूमि पर किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं है। डामर प्लांट केवल औद्योगिक या व्यावसायिक भूमि पर ही स्थापित किए जा सकते हैं।
इस प्लांट से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण ने आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण के कारण पशुओं के लिए चराई का संकट पैदा हो गया है।
50 हजार में बेच दी गोचर भूमि!
इस मामले में ग्राम विकास अधिकारी विवेक सिंह ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पंचायत की आय बढ़ाने के लिए ठेकेदार को NOC जारी की गई थी।
इसके बदले में ठेकेदार ने ग्राम पंचायत में 50 हजार रुपए की रसीद कटवाई है।
वहीं, सरपंच अमरसिंह ने भी स्वीकार किया है कि पंचायत की ओर से ठेकेदार को NOC जारी की गई है।
सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता कुलदीप गोराणा ने स्पष्ट किया है कि गोचर भूमि पर डामर प्लांट लगाना पूरी तरह से अवैध है।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
इस पूरे मामले से नाराज ग्रामीणों ने VDO को तत्काल निलंबित करने की मांग की है। उन्होंने सरपंच के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अगर प्रशासन ने जल्द ही इस पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो वे एक बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
यह मामला दर्शाता है कि कैसे कुछ अधिकारी और जनप्रतिनिधि निजी लाभ के लिए सरकारी नियमों और पर्यावरण की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे स्थानीय समुदाय को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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