जयपुर | राजस्थान की गुलाबी नगरी में भक्ति और गौरव का एक अनूठा संगम देखने को मिलने वाला है। आगामी 11 मई, 2026 को सोमनाथ मंदिर पर हुए प्रथम आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।
इसी ऐतिहासिक अवसर पर मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का आयोजन किया जाएगा। भारत सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्रालय के निर्देशानुसार यह पर्व देशव्यापी स्तर पर मनाया जाएगा।
राजस्थान सरकार ने इस आयोजन को भव्य बनाने के लिए कमर कस ली है। देवस्थान विभाग और कला एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में प्रदेश के 41 जिलों में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
आस्था का केंद्र बनेगा झारखंड महादेव मंदिर
जयपुर स्थित प्रसिद्ध झारखंड महादेव मंदिर को राज्य स्तरीय कार्यक्रम के मुख्य केंद्र के रूप में चुना गया है। यहाँ 11 मई को सुबह से ही शिव स्तुति और भजनों की मधुर गूंज सुनाई देगी।
कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से होगी, जिसमें प्रदेश के विख्यात कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान भगवान शिव का विशेष श्रृंगार और पूजा-अर्चना की जाएगी, जो आकर्षण का केंद्र होगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस गरिमामयी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वे यहाँ उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे और सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक व आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालेंगे।
प्रधानमंत्री का सीधा संबोधन और राष्ट्रीय जुड़ाव
देवस्थान विभाग के आयुक्त लक्ष्मी नारायण मंत्री ने बताया कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर में आयोजित होने वाले मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जयपुर के कार्यक्रम स्थल पर भी किया जाएगा।
इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उपस्थित रहेंगे। प्रदेश के श्रद्धालु डिजिटल माध्यम से प्रधानमंत्री के संबोधन और सोमनाथ मंदिर की भव्य आरती का सीधा आनंद कार्यक्रम स्थल पर ले सकेंगे।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की सांस्कृतिक अखंडता और स्वाभिमान का प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर के गौरव को जन-जन तक पहुँचाना इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य है।
"राज्य के 41 जिलों में 11 मई को निकटतम शिवालय में आयोजित हो रहे उक्त कार्यक्रम में सहभागी बनकर इस ऐतिहासिक पर्व के साक्षी बनें।" - लक्ष्मी नारायण मंत्री, आयुक्त देवस्थान विभाग
कलश यात्रा और सामूहिक महाआरती
राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान एक भव्य कलश यात्रा भी निकाली जाएगी। इसमें बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु और स्थानीय निवासी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर अपनी अटूट भक्ति का प्रदर्शन करेंगे।
मंदिर परिसर में भगवान शिव के विशेष दर्शन की व्यवस्था की गई है। पूरे दिन चलने वाले इस उत्सव का समापन सामूहिक महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ होगा, जिसमें हजारों लोगों के जुटने की उम्मीद है।
कला एवं संस्कृति विभाग की शासन सचिव श्रीमती शुचि त्यागी ने बताया कि इस पर्व के माध्यम से सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता तैयारियां
कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए रविवार को झारखंड महादेव मंदिर परिसर में एक उच्च स्तरीय तैयारी बैठक आयोजित की गई। इसमें जिला प्रशासन और देवस्थान विभाग के आला अधिकारी शामिल हुए।
जयपुर जिला कलेक्टर सन्देश नायक ने आयोजन की सुरक्षा और सुचारू व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर में प्रवेश और निकास के अलग-अलग द्वार निर्धारित किए गए हैं।
दर्शनार्थियों के लिए गेट नम्बर-2 से आवागमन की विशेष व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन, पुलिस और स्वयंसेवी संस्थाएं मिलकर भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन का कार्य संभालेंगी ताकि किसी श्रद्धालु को असुविधा न हो।
सोशल मीडिया और व्यापक प्रचार-प्रसार
राज्य नोडल अधिकारी श्रीमती अनुराधा गोगिया ने बताया कि इस आयोजन को डिजिटल मंचों पर भी बड़े स्तर पर प्रचारित किया जा रहा है। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को इस स्वाभिमान पर्व से जुड़ने का आह्वान किया जा रहा है। इसका उद्देश्य घर-घर तक सोमनाथ का संदेश पहुँचाना है।
अतिरिक्त आयुक्त गीतेश मालवीय और सहायक आयुक्त रतन लाल योगी ने भी तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी धार्मिक अनुष्ठानों की रूपरेखा अंतिम रूप से तय की।
राजस्थान के कोने-कोने में स्थित शिवालयों में इस दिन विशेष सजावट की जाएगी। यह उत्सव राज्य की सांस्कृतिक एकता और गौरवशाली इतिहास के प्रति सम्मान को प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम बनेगा।
अंततः, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व राजस्थान के लोगों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने और राष्ट्र के गौरवशाली अतीत को नमन करने का एक सुनहरा अवसर साबित होगा जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।
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