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डॉ. मोहित टांटिया का ‘गर्भाशक्ति’ मॉडल: श्रीगंगानगर: मातृत्व को संबल दे रही ‘गर्भाशक्ति’ योजना

thinQ360 · 17 अक्टूबर 2026, 10:42 रात
श्रीगंगानगर के डॉ. एस.एस. टांटिया मेडिकल कॉलेज में 'गर्भाशक्ति' योजना के जरिए गर्भवती महिलाओं को निःशुल्क दवाएं और बेटियों के जन्म पर विशेष सम्मान दिया जा रहा है।

श्रीगंगानगर | नारी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि सृजन, संवेदना और जीवन की आधारशिला है। इसी सोच को श्रीगंगानगर का डॉ. एस.एस. टांटिया मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर केवल चिकित्सा की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे सामाजिक सरोकार, अपनत्व और सेवा से जोड़कर देखता है।

गर्भाशक्ति योजना: मातृत्व को सेवा और सम्मान का संबल

शारदीय नवरात्र के अवसर पर अस्पताल की ‘गर्भाशक्ति’ योजना इसी भावना को एक अलग पहचान देती है। यह पहल गर्भवती महिलाओं को केवल उपचार उपलब्ध कराने की कोशिश नहीं, बल्कि गर्भावस्था के दौरान उन्हें भरोसा, सहयोग और संबल देने का प्रयास भी है।

इस पहल के पीछे टांटिया यूनिवर्सिटी के वाइस चेयरपर्सन डॉ. मोहित टांटिया की सोच और नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। युवा नेतृत्व के बावजूद उनकी दृष्टि केवल अस्पताल, चिकित्सा शिक्षा या संस्थान के विस्तार तक सीमित नहीं दिखाई देती।

सेवा को बनाया संस्थान की मूल पहचान

उनका जोर इस बात पर है कि किसी चिकित्सा संस्थान की पहचान केवल उसकी इमारतों और सुविधाओं से नहीं, बल्कि इस बात से होनी चाहिए कि वह समाज के सबसे संवेदनशील समय में लोगों के कितने करीब खड़ा होता है।

यही कारण है कि यहां सेवा को केवल एक व्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि संस्थान की मूल भावना के रूप में विकसित करने की कोशिश की गई है।

20 मार्च 2023 से शुरू हुई स्वास्थ्य क्रांति

20 मार्च 2023 से शुरू की गई ‘गर्भाशक्ति’ योजना का उद्देश्य गर्भवती मां और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य को बेहतर देखभाल से जोड़ना है। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को आयरन और कैल्शियम की गोलियां तथा टीटी के इंजेक्शन निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

यह सुविधा उन महिलाओं के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जिनके लिए गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य देखभाल का आर्थिक बोझ भी चिंता का कारण बन सकता है। अस्पताल के अनुसार, अब तक 10 हजार से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ ले चुकी हैं।

बेटी के जन्म पर सम्मान की अनूठी पहल

‘गर्भाशक्ति’ योजना का एक भावनात्मक पक्ष बालिका के जन्म से जुड़ा है। अस्पताल में बेटी के जन्म पर मां को एक किलो देशी घी देकर बालिका के आगमन का सम्मान किया जाता है।

यह केवल एक प्रतीकात्मक उपहार नहीं, बल्कि उस सामाजिक संदेश का हिस्सा है जिसमें बेटी के जन्म को खुशी, सम्मान और उत्सव से जोड़ने की कोशिश की गई है।

2024 के आंकड़े: हजारों परिवारों में आई खुशहाली

वर्ष 2024 से अब तक अस्पताल में 2,567 बालकों और 2,465 बालिकाओं ने जन्म लिया है। इन आंकड़ों के पीछे हजारों परिवारों की उम्मीदें, मातृत्व की संवेदनाएं और एक नए जीवन की शुरुआत जुड़ी है।

यही कारण है कि अस्पताल की यह पहल चिकित्सा सुविधा से आगे बढ़कर परिवार और समाज से जुड़ी एक मानवीय जिम्मेदारी का रूप लेती दिखाई देती है।

सरकारी योजनाओं और कम शुल्क का मॉडल

अस्पताल की जनकल्याणकारी सोच केवल ‘गर्भाशक्ति’ योजना तक सीमित नहीं है। लाडो और राजश्री जैसी सरकारी योजनाओं के पंजीकरण में भागीदारी, कम दरों पर प्रसव सुविधा और जन सेवा हॉस्पिटल में 10 रुपये OPD तथा 20 रुपये IPD शुल्क जैसी व्यवस्थाएं भी इसी मॉडल का हिस्सा हैं।

इन सुविधाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक स्थिति किसी व्यक्ति और आवश्यक चिकित्सा सेवा के बीच बाधा न बने।

डॉ. मोहित टांटिया: इलाज से पहले इंसान का विचार

डॉ. मोहित टांटिया की कार्यशैली में एक बात स्पष्ट दिखाई देती है—स्वास्थ्य सेवा को केवल उपचार की प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखना।

उनकी सोच इस विचार पर आधारित नजर आती है कि तकनीक, संस्थान और चिकित्सा सुविधाएं कितनी भी आधुनिक क्यों न हों, मरीज के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसका भरोसा और उसके प्रति दिखाई गई संवेदना होती है।

यही दृष्टि उन्हें केवल एक प्रशासनिक नेतृत्वकर्ता के बजाय सेवा-केंद्रित युवा नेतृत्व के रूप में अलग पहचान देती है। शारदीय नवरात्र में नारी सम्मान का यह संदेश श्रीगंगानगर से शुरू होकर समाज को नई दिशा दे रहा है।

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