जयपुर |राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरपालिका चुनावों में डाक मतपत्रों की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। आयोग ने डाक मतपत्रों की जांच और उन्हें नामंजूर करने के संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो 21 अक्टूबर 2019 के पुराने आदेश की जगह लेंगे।
इन नए निर्देशों का उद्देश्य मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता लाना है।
मतगणना के लिए समय-सीमा तय
आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतगणना शुरू होने के लिए जो समय निर्धारित किया गया है, उसके बाद प्राप्त होने वाले किसी भी डाक मतपत्र को गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। यह नियम समय की पाबंदी को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
लिफाफों की होगी पहली जांच
मतगणना प्रक्रिया के तहत, सबसे पहले निर्धारित समय तक प्राप्त हुए लिफाफों की जांच की जाएगी। अगर किसी लिफाफे के घोषणा पत्र में मतदाता के हस्ताक्षर, प्रमाणीकरण या मतपत्र के क्रमांक से संबंधित कोई त्रुटि पाई जाती है, तो उसे खोला नहीं जाएगा। ऐसे लिफाफे को सीधे तौर पर नामंजूर कर दिया जाएगा।
किन स्थितियों में मतपत्र होगा नामंजूर?
आयोग ने उन स्थितियों को भी सूचीबद्ध किया है जिनके तहत मतपत्र को अवैध माना जाएगा।
- मतपत्र पर मतदाता की पहचान उजागर करने वाला कोई निशान या कुछ लिखा हो।
- एक से अधिक उम्मीदवार या उम्मीदवार और नोटा दोनों को मत दिया गया हो।
- मतपत्र के पीछे की तरफ मत अंकित किया गया हो।
- मतपत्र बनावटी, नकली या किसी भी तरह से क्षतिग्रस्त हो।
- मतपत्र निर्धारित लिफाफे में वापस नहीं भेजा गया हो।
- यह स्पष्ट न हो कि मत किस उम्मीदवार को दिया गया है।
कब वैध माना जाएगा मत?
हालांकि, आयोग ने यह भी साफ किया है कि कुछ तकनीकी खामियों के आधार पर मतपत्र को खारिज नहीं किया जाएगा। यदि किसी मतदाता ने निर्धारित उपकरण की जगह पेन या स्याही से 'X' या टिक का निशान लगाया है, तो केवल इस आधार पर मत को अमान्य नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा, यदि निशान अस्पष्ट है या एक से अधिक बार लगाया गया है, लेकिन मतदाता की मंशा साफ है कि उसने किसे वोट दिया है, तो उस मत को वैध माना जाएगा।
उम्मीदवारों को मिलेगा देखने का अवसर
किसी भी मतपत्र को नामंजूर करने से पहले, रिटर्निंग अधिकारी को वहां उपस्थित उम्मीदवार या उसके निर्वाचन अभिकर्ता को उसे देखने का पूरा अवसर देना होगा। हालांकि, उन्हें मतपत्र को छूने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
रिटर्निंग अधिकारी के लिए यह भी अनिवार्य होगा कि वह नामंजूर किए गए हर मतपत्र पर उसका कारण स्पष्ट रूप से लिखें। आयोग ने जोर देकर कहा है कि बताए गए आधारों के अलावा किसी अन्य कारण से कोई भी डाक मतपत्र नामंजूर नहीं किया जाएगा।
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