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शेयर बाजार में हाहाकार: शेयर बाजार धराशायी: 3 दिन में निवेशकों के 7 लाख करोड़ स्वाहा

बलजीत सिंह शेखावत · 24 अप्रैल 2026, 02:19 दोपहर
सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता।

मुंबई | भारतीय शेयर बाजार में पिछले तीन दिनों से जारी भारी गिरावट ने निवेशकों की कमर तोड़कर रख दी है। शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में जबरदस्त बिकवाली देखी गई, जिससे निवेशकों के करीब 7 लाख करोड़ रुपये डूब गए।

बाजार में मचे इस हाहाकार के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक तनाव और आर्थिक अस्थिरता को जिम्मेदार माना जा रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी अब 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया है, जो काफी चिंताजनक है।

वैश्विक तनाव और कच्चे तेल का बढ़ता दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक हफ्ते में 18% उछल गई हैं।

कच्चे तेल की इन बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और बड़ी कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने की प्रबल संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति के कड़े बयानों ने वैश्विक निवेशकों के बीच डर और घबराहट को और अधिक बढ़ा दिया है।

रुपये की गिरावट और विदेशी निवेशकों की निकासी

भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले गिरकर 94.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। रुपये की इस कमजोरी ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) को भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालने पर मजबूर कर दिया है।

पिछले चार कारोबारी सत्रों में FII ने भारतीय शेयर बाजार के कैश सेगमेंट से लगभग 8,300 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए अब 24,300 का स्तर पार करना एक बहुत बड़ी चुनौती साबित होगी।

"जब तक वैश्विक तनाव का कोई ठोस हल नहीं निकलता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता का यह दौर जारी रहने की पूरी संभावना है।"

बाजार का भविष्य और निवेशकों के लिए जरूरी सलाह

बाजार के तकनीकी जानकारों का मानना है कि निफ्टी आने वाले समय में 23,900 के निचले स्तर तक भी गिर सकता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे इस अस्थिर माहौल में घबराहट में आकर जल्दबाजी में शेयर न बेचें।

बाजार में स्थायी रिकवरी के लिए वैश्विक स्थितियों में सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में कमी होना बेहद जरूरी है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही निवेश बनाए रखना चाहिए।

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