जयपुर | राजस्थान में छात्र आंदोलन एक अत्यंत गंभीर और नाजुक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। छात्रसंघ चुनावों की बहाली और राजस्थानी भाषा को सम्मान दिलाने की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक छात्र नेता की जिंदगी और मौत का सवाल बन गया है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता शुभम रेवाड़ के आमरण अनशन का आज सोमवार को 12वां दिन है। उनकी हालत बेहद नाजुक है और उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती कराया गया है।
अनशन से स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर
लगातार 12 दिनों से अन्न और जल का त्याग करने के कारण शुभम रेवाड़ का स्वास्थ्य अत्यंत चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। मेडिकल टीम ने उनकी बिगड़ती हालत को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है, जिससे समर्थकों और परिवार में चिंता की लहर दौड़ गई है।
स्वास्थ्य पर मंडराता गंभीर खतरा
एसएमएस अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों की एक टीम चौबीसों घंटे शुभम रेवाड़ के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। उनके शरीर पर अनशन के गंभीर प्रभाव दिखने लगे हैं, जो किसी भी समय एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकते हैं।
कीटोन्स का खतरनाक स्तर
सूत्रों के अनुसार, लंबे समय तक भोजन न करने के कारण शरीर में 'कीटोन्स' का स्तर खतरनाक सीमा को पार कर चुका है। यह स्थिति शरीर के आंतरिक अंगों के लिए बेहद हानिकारक होती है।
ऑर्गन फेलियर की आशंका
मेडिकल जांच में यह बात सामने आई है कि उनके आंतरिक अंगों पर असर पड़ना शुरू हो गया है। डॉक्टरों का स्पष्ट मानना है कि यदि अनशन को तत्काल समाप्त नहीं कराया गया, तो किडनी फेलियर सहित अन्य अंगों के फेल होने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। चिकित्सकों ने राज्य सरकार और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
ICU में भी जारी है संघर्ष
शुभम रेवाड़ पहले राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर अनशन पर बैठे थे। स्वास्थ्य बिगड़ने पर पुलिस और जिला प्रशासन ने उन्हें जबरन वहां से उठाकर एसएमएस अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
मांगों पर अडिग शुभम
अस्पताल के बेड और फिर ICU में शिफ्ट किए जाने के बावजूद शुभम अपने संकल्प पर अडिग हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनका आमरण अनशन तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं कर देती।
क्या हैं प्रमुख मांगें?
यह आंदोलन दो प्रमुख मांगों को लेकर किया जा रहा है, जो प्रदेश के छात्रों और भाषा प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
1. छात्रसंघ चुनाव की बहाली
आंदोलन की सबसे बड़ी मांग राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों को फिर से बहाल करना है, ताकि छात्रों को उनका लोकतांत्रिक अधिकार मिल सके।
2. राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना
दूसरी प्रमुख मांग राजस्थान विश्वविद्यालय में एक नियमित राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना करना है, ताकि प्रदेश की अपनी भाषा को अकादमिक सम्मान और संरक्षण मिल सके।
सियासी और सामाजिक गलियारों में हलचल
शुभम की बिगड़ती हालत ने प्रदेश के सियासी और सामाजिक माहौल में गर्मी ला दी है। सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर ने सरकार की संवेदनहीनता की आलोचना की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने समय पर छात्रों से बात करके इस गतिरोध को समाप्त नहीं किया, तो पूरे प्रदेश के युवाओं का गुस्सा सड़कों पर उतर सकता है।
सोशल मीडिया पर गरमाया मुद्दा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी सरकार के खिलाफ एक अभियान सा छिड़ गया है। लोग लगातार पोस्ट के माध्यम से सरकार से अपील कर रहे हैं। एक वायरल पोस्ट में लिखा है, "राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र नेता भाई शुभम रेवाड़ पिछले 12 दिनों से आमरण अनशन पर हैं। सरकार से निवेदन है कि उनके गिरते स्वास्थ्य को गंभीरता से लेते हुए जायज मांगों पर शीघ्र फैसला ले।"
सरकार का रुख और सुरक्षा व्यवस्था
छात्रों के बढ़ते आक्रोश और शुभम की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। एसएमएस अस्पताल परिसर और राजस्थान विश्वविद्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है।
संवादहीनता का आरोप
छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों पर बातचीत करने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वह छात्रों से संवाद की कोई पहल करती है या यह गतिरोध यूं ही जारी रहेगा।
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