सांचौर | राजस्थान की सियासत में अपने निराले अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व मंत्री और सांचौर के कद्दावर नेता सुखराम बिश्नोई एक बार फिर एक्शन में हैं। ढाई साल बाद वे अपने पुराने 'दरी' वाले अवतार में लौट आए हैं, जहां वे आम जनता के मुद्दों को लेकर सीधे सरकारी दफ्तरों के बाहर धरना दे रहे हैं। इस बार उनके निशाने पर वर्तमान भाजपा सरकार की कार्यशैली है, जिसे लेकर उन्होंने किसानों से लेकर बिजली-पानी तक के मुद्दों पर तीखा प्रहार किया है।
किसानों का दर्द: अनुदान और बीमा क्लेम पर सरकार की चुप्पी
पूर्व मंत्री सुखराम बिश्नोई ने किसानों की अनदेखी को अपना सबसे बड़ा मुद्दा बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के हक पर कुंडली मारकर बैठी है।
2022 से अटका करोड़ों का अनुदान
बिश्नोई ने बताया कि साल 2022 का कृषि आदान अनुदान आज तक किसानों को नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि चितरवाना उपखंड का करीब 8 करोड़ और सांचौर की पांच पंचायतों का 12 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन राशि अटकी हुई है।
फसल बीमा पर भी रोक
किसानों के लिए दूसरा बड़ा संकट फसल बीमा क्लेम का रुकना है। बिश्नोई ने मांग की है कि 2025 का रुका हुआ अनुदान और पूरा बीमा क्लेम तत्काल किसानों के खातों में डाला जाए।
नर्मदा नहर: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी जीवनदायिनी
सांचौर की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नहर परियोजना में भी पूर्व मंत्री ने गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।
सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
उन्होंने कहा कि नहर की सफाई के लिए 21 दिन का क्लोजर लिया गया, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ।
बिश्नोई ने चुनौती दी कि ठेकेदारों के कागजात सार्वजनिक किए जाएं ताकि सच्चाई सामने आ सके।
सीपेज से बंजर होती जमीन
नहर के कमजोर निर्माण के कारण हो रहे सीपेज से किसानों की हजारों बीघा जमीन खराब हो रही है।
उन्होंने सरकार द्वारा आवंटित 2 करोड़ रुपये से तत्काल सर्वे कराकर नहरों को दुरुस्त करने की मांग की। साथ ही सिंचाई के लिए 60% फ्लो और 40% लिफ्ट का फॉर्मूला सख्ती से लागू करने को कहा।
बिजली-पानी का संकट और JJM में बड़ा घोटाला
क्षेत्र की बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। बिश्नोई ने बिजली और पानी की व्यवस्था पर अधिकारियों को आड़े हाथों लिया।
2-3 घंटे बिजली, अंधेरे में डूबे गांव
भीषण गर्मी में गांवों को मात्र 2-3 घंटे बिजली मिल रही है। हाल ही में आए तूफान के बाद कई गांव 5-5 दिन तक अंधेरे में डूबे रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक्सईएन (XEN) स्तर के अधिकारी फील्ड से नदारद हैं और कोई मॉनिटरिंग नहीं हो रही है।
जल जीवन मिशन में घटिया काम
बिश्नोई ने जल जीवन मिशन (JJM) में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में कोई निगरानी नहीं हुई।
टंकियां घटिया सामग्री से बनी हैं और पाइपलाइन को 3 फीट की जगह सिर्फ डेढ़-दो फीट पर डालकर खानापूर्ति की गई है, जिससे वे टूट रही हैं।
पट्टों का विवाद और राजनीतिक दांवपेंच
प्रशासन द्वारा नर्मदा कॉलोनी, खेतेश्वर कॉलोनी और हरिजन कॉलोनी में लोगों को मकान खाली करने के नोटिस दिए जाने का बिश्नोई ने कड़ा विरोध किया है।
वैध पट्टाधारकों को क्यों किया जा रहा परेशान?
उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोगों के पास प्रशासन के दिए वैध पट्टे हैं, तो 21 साल बाद उन्हें बेदखल करना कहां का न्याय है?
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पट्टे गलत थे तो तत्कालीन अधिकारियों और चेयरमैन को जेल भेजा जाए, आम जनता को नहीं।
हम लगातार संघर्ष कर रहे हैं, सरकार हमारी आएगी और ठोक कर सांचौर को वापस जिला बनाएंगे।
'हार के डर से चुनाव टाल रही सरकार'
राजनीतिक मोर्चे पर उन्होंने सरकार पर पंचायती राज चुनाव टालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा हार से डर गई है, इसलिए 2027 की जनगणना और ओबीसी आरक्षण का बहाना बना रही है।
विरोधियों पर तंज, देवजी पटेल की तारीफ
बातचीत के दौरान उन्होंने सांचौर के वर्तमान विधायक के चुनावी वादों को 'हवाहवाई' करार दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि को धरातल पर सच बोलना चाहिए।
वहीं, भाजपा नेता देवजी पटेल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने उनकी तारीफ की। उन्होंने कहा, "देवजी झूठी बात नहीं करते, वे मुंह पर खरी बात कहते हैं।"
ढाई साल बाद सुखराम बिश्नोई का सड़क पर उतरना यह संकेत देता है कि वे 2028 के चुनावों तक चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने जमीनी मुद्दों को उठाकर सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है।
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