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राजनीति

इंसानियत सबसे बड़ा धर्म: सनी देओल: सनी देओल बोले- मैं धर्म-राजनीति से हमेशा दूर रहता हूं

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जयपुर में 'बंटवारा 1947' के प्रमोशन पर सनी देओल ने कहा- मैं लोगों को बांटने वाली फिल्में नहीं करता, 'गदर' भी सिर्फ एक प्रेम कहानी थी।

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HIGHLIGHTS

  • सनी देओल अपनी आगामी फिल्म 'बंटवारा 1947' के प्रमोशन के लिए जयपुर पहुंचे।
  • उन्होंने कहा कि वे खुद को धर्म और राजनीति से हमेशा दूर रखते आए हैं।
  • सनी ने स्पष्ट किया कि 'गदर' उनके लिए कभी हिंदू-मुस्लिम फिल्म नहीं, बल्कि एक प्रेम कहानी थी।
  • फिल्म का सबसे बड़ा संदेश मां और मानवता है, जिसमें मनोरंजन और एक्शन भी शामिल है।
sunny deol says i stay away from religion and politics in jaipur

जयपुर |

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सनी देओल अपनी आगामी फिल्म 'बंटवारा 1947' के प्रमोशन के सिलसिले में जयपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर कार्यालय में फिल्म, अपने लंबे करियर और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बात की।

सनी देओल के साथ उनके बेटे करण देओल और निर्देशक राजकुमार संतोषी भी मौजूद थे।

मैं धर्म-राजनीति से हमेशा दूर रहता हूं

सनी देओल ने कहा कि आज समाज में हर बात को धर्म और राजनीति से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन वे खुद को इससे हमेशा दूर रखते हैं।

उन्होंने कहा, "मैं कभी ऐसी फिल्में नहीं करता जो लोगों को बांटती हों। लोग कई बार फिल्मों को अलग नजरिए से देखने लगते हैं, जबकि उनका उद्देश्य बिल्कुल अलग होता है।"

'गदर' भी एक प्रेम कहानी थी

अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'गदर' का जिक्र करते हुए सनी ने कहा, "'गदर' भी मेरे लिए कभी हिंदू-मुस्लिम फिल्म नहीं थी, वह एक परिवार और एक प्रेम कहानी थी।"

उन्होंने आगे कहा कि फिल्म में वे किसी धर्म का नहीं, बल्कि इंसानियत का चेहरा दिखाना चाहते हैं। अंत में जीत हमेशा इंसानियत की ही होती है।

यह फिल्म फैसला नहीं सुनाती

फिल्म 'बंटवारा 1947' के बारे में बात करते हुए सनी ने बताया कि यह भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर बनी है, लेकिन यह तय नहीं करती कि कौन सही था और कौन गलत।

उन्होंने कहा, "यह कहानी रिश्तों के टूटने और फिर जुड़ने की है। भटका हुआ इंसान सही रास्ते पर लौटता है।"

सनी ने बताया कि बचपन में उन्होंने पंजाब के गांवों में विभाजन की कई सच्ची कहानियां सुनी थीं। उन्होंने कहा, "लोग मारने वालों की बातें करते हैं, लेकिन जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरे धर्म के लोगों को बचाया, उनकी कहानियां कम सुनाई जाती हैं। हमारी फिल्म उन्हीं इंसानों को सलाम करती है।"

मां की सेवा सबसे बड़ा कर्म

सनी देओल ने भावुक होते हुए कहा कि फिल्म का सबसे बड़ा संदेश मां और मानवता है। उन्होंने कहा, "मां की सेवा से बड़ा कोई कर्म नहीं और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं।"

फिल्म का एक संवाद साझा करते हुए उन्होंने कहा, "'कोई मजहब बुरा नहीं होता, अच्छा-बुरा इंसान होता है।' यही इस फिल्म का सार है।"

राजस्थान से पुराना रिश्ता

राजस्थान से अपने लगाव पर सनी देओल ने कहा कि उनका रिश्ता इस प्रदेश से बचपन से जुड़ा है। वे अपने पिता धर्मेंद्र के साथ यहां आते रहे हैं।

उन्होंने कहा, "यहां कई फिल्मों की शूटिंग की है। मौका मिलता है तो राजस्थान की सड़कों और गांवों में खुद गाड़ी चलाकर घूमने निकल जाता हूं। यहां एक अलग ही शांति और खुलापन महसूस होता है।"

*Edit with Google AI Studio

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