राजनीति

विजय की सरकार और गठबंधन का पेच: तमिलनाडु में विजय की सरकार के लिए AIADMK छोड़ सकती है NDA

बलजीत सिंह शेखावत · 08 मई 2026, 01:39 दोपहर
तमिलनाडु में बहुमत जुटाने के लिए थलपति विजय की पार्टी TVK और AIADMK के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट तेज।

चेन्नई | तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन किया है।

विजय की पार्टी ने विधानसभा की 108 सीटों पर जीत हासिल की है। हालांकि, इस बड़ी जीत के बावजूद वे बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गए हैं। तमिलनाडु में कुल 234 सीटें हैं।

प्रदेश में किसी भी दल को अपनी सरकार बनाने के लिए कम से कम 118 सीटों की आवश्यकता होती है। विजय की पार्टी वर्तमान में इस जादुई आंकड़े से 10 सीटें दूर है।

बहुमत का गणित और कांग्रेस का साथ

विजय को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस ने अपना समर्थन देने का एलान किया है। चुनाव में कांग्रेस के पास पांच विधायक जीतकर आए हैं। यह समर्थन विजय के लिए महत्वपूर्ण है।

कांग्रेस के समर्थन के बाद विजय की पार्टी के पास कुल 113 विधायकों का समर्थन हो गया है। इसके बावजूद, बहुमत के लिए अभी भी 5 और विधायकों की जरूरत बनी हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिना किसी बड़े गठबंधन के विजय के लिए सरकार बनाना चुनौतीपूर्ण होगा। इसी बीच राज्य में नए गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

AIADMK और बीजेपी के रिश्तों में दरार

तमिलनाडु चुनाव में बीजेपी ने AIADMK के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। हालांकि, इस गठबंधन को चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बीजेपी महज एक सीट जीत पाई है।

दूसरी ओर, AIADMK ने 47 सीटों पर जीत दर्ज की है। वह राज्य में तीसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। अब पार्टी अपने भविष्य को लेकर मंथन कर रही है।

इंडिया टूडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, AIADMK अब बीजेपी से अपना नाता तोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही है। पार्टी के भीतर इसे लेकर बैठकों का दौर जारी है।

क्या विजय और AIADMK आएंगे साथ?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीजेपी के साथ गठबंधन होने के कारण AIADMK विजय की पार्टी TVK के साथ हाथ नहीं मिला पा रही है। यह एक बड़ी बाधा है।

विजय की पार्टी की विचारधारा और बीजेपी की राजनीति में बड़ा अंतर देखा जा रहा है। इसी वजह से AIADMK अब एनडीए (NDA) से अलग होने का मन बना रही है।

"राज्य की जनता ने हमें बड़ी जिम्मेदारी दी है। हम प्रदेश के विकास के लिए सभी संभावनाओं और गठबंधन के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।"

अगर AIADMK बीजेपी का साथ छोड़ती है, तो तमिलनाडु में एक नया राजनीतिक समीकरण जन्म लेगा। इससे विजय की सरकार बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो सकता है।

भविष्य की रणनीति पर मंथन

AIADMK के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि विजय के साथ गठबंधन करने से पार्टी को भविष्य में मजबूती मिलेगी। बीजेपी के साथ रहने से उन्हें वोट बैंक का नुकसान हुआ है।

तमिलनाडु की जनता ने इस बार बदलाव के लिए वोट दिया है। विजय की लोकप्रियता और AIADMK का संगठनात्मक ढांचा मिलकर राज्य को एक स्थिर सरकार प्रदान कर सकते हैं।

फिलहाल, सभी की निगाहें AIADMK के आधिकारिक फैसले पर टिकी हैं। यदि यह गठबंधन होता है, तो तमिलनाडु की राजनीति में दशकों पुराना द्रविड़ वर्चस्व एक नए रूप में दिखेगा।

निष्कर्ष के तौर पर, तमिलनाडु में सत्ता की चाबी अब AIADMK के हाथों में नजर आ रही है। विजय की पहली सरकार बनने का सपना अब गठबंधन की राजनीति के फैसलों पर टिका है।

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