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दिल्ली: एक आधार कार्ड, दो जन्मतिथियां! माता-पिता ने जिसे फर्जी बताया, वही एसडीएम रिकॉर्ड में मिला

गणपत सिंह मांडोली · 06 सितम्बर 2026, 12:07 दोपहर

पश्चिमी दिल्ली। उत्तम नगर के हस्तसाल में होली की रात हुए तरुण हत्याकांड में मुख्य आरोपित के बालिग या नाबालिग होने का विवाद अब और पेचीदा हो गया है। शनिवार को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) में हुई सुनवाई के दौरान ऐसा दस्तावेज सामने आया, जिसने उम्र से जुड़े पूरे मामले पर नया सवाल खड़ा कर दिया।

एसडीएम द्वारका कार्यालय की ओर से बोर्ड के सामने पेश किए गए रिकॉर्ड में वही आधार कार्ड मिला, जिसे पिछली सुनवाई में आरोपित के माता-पिता ने फर्जी बताते हुए पहचानने से इनकार कर दिया था। खास बात यह है कि एसडीएम कार्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया के दौरान यही आधार कार्ड आरोपित के माता-पिता की ओर से कार्यालय में जमा कराया गया था।

सुनवाई के दौरान एसडीएम द्वारका के प्रतिनिधि के तौर पर तहसीलदार बोर्ड के सामने उपस्थित हुए और आरोपित के माता-पिता द्वारा एसडीएम कार्यालय में जमा कराए गए दस्तावेज पेश किए। दस्तावेजों की जांच में आधार कार्ड को लेकर महत्वपूर्ण अंतर सामने आया।

एक ही आधार कार्ड, दो अलग-अलग जन्मतिथियां

पिछली सुनवाई में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता सुमित चौहान ने स्कूल रिकॉर्ड में मौजूद आधार कार्ड की प्रति बोर्ड के सामने रखी थी। उस प्रति में आरोपित का जन्म वर्ष 2007 दर्ज था।

वहीं शनिवार को एसडीएम कार्यालय से पेश की गई आधार कार्ड की प्रति में जन्मतिथि 7 अक्टूबर 2011 दर्ज मिली। दोनों प्रतियों में आधार नंबर, घर का पता और तस्वीर समान बताई गई है। ऐसे में एक ही आधार कार्ड की प्रतियों में जन्मतिथि का अलग-अलग होना अब मामले का सबसे अहम सवाल बन गया है।

जिसे माता-पिता ने फर्जी कहा, वही सरकारी रिकॉर्ड में कैसे?

पिछली सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने जब यही आधार कार्ड आरोपित के माता-पिता के सामने रखा था, तो उन्होंने न केवल दस्तावेज को फर्जी बताया था, बल्कि उसमें लगी तस्वीर को भी अपने बेटे की तस्वीर मानने से इनकार कर दिया था।

अब एसडीएम कार्यालय के रिकॉर्ड में उसी आधार कार्ड की मौजूदगी और उसे जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में माता-पिता की ओर से जमा किए जाने की बात सामने आने के बाद उम्र निर्धारण की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण हो गई है।

2012 का वीडियो भी बना अहम साक्ष्य

इससे पहले अभियोजन पक्ष ने बोर्ड के सामने वर्ष 2012 का करीब 14 वर्ष पुराना वीडियो भी पेश किया था। अब आधार कार्ड की अलग-अलग प्रतियों में दर्ज जन्मतिथि का अंतर और पुराने वीडियो समेत उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आरोपित की वास्तविक उम्र का निर्धारण इस मामले में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक ही आधार नंबर, एक ही पते और एक ही तस्वीर वाले दस्तावेज में जन्मतिथि अलग-अलग कैसे दर्ज हुई? जेजेबी के सामने अब इन दस्तावेजों की विश्वसनीयता और आरोपित की वास्तविक उम्र दोनों की जांच अहम हो गई है।

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