पश्चिमी दिल्ली | उत्तम नगर के हस्तसाल में होली की रात हुए तरुण हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया है। मामले में मुख्य आरोपित फैजान को अब बालिग घोषित कर दिया गया है। किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की गहन जांच के बाद उसकी जन्मतिथि 7 अक्टूबर 2007 निर्धारित की है। इस फैसले के बाद उसके खिलाफ वयस्क आरोपित के तौर पर मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है।
किशोर न्याय बोर्ड का बड़ा फैसला
किशोर न्याय बोर्ड-7, द्वारका की प्रधान मजिस्ट्रेट चित्रांशी अरोड़ा तथा सदस्य पूनम उपाध्याय और चंद्र सुमन कुमार की पीठ ने यह आदेश दिया। यह आदेश उत्तम नगर थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़े उम्र निर्धारण के मामले में आया है। पश्चिमी जिले के एसडीएम पहले ही वर्ष 2011 की जन्मतिथि वाले जन्म प्रमाण पत्र को निरस्त कर चुके थे। बोर्ड ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद स्कूल रिकॉर्ड की तुलना में नगर निगम के रिकॉर्ड को प्राथमिकता दी।
स्कूल रिकॉर्ड और जन्मतिथि विवाद
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने स्कूल के दस्तावेज पेश किए थे, जिनमें फैजान की जन्मतिथि 7 अक्टूबर 2011 दर्ज थी। हालांकि, शिकायतकर्ता के अधिवक्ता सुमित चौहान ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। अधिवक्ता ने नगर निगम के पुराने जन्म रिकॉर्ड का हवाला दिया, जिसमें जन्मतिथि 2007 दर्ज थी। विवाद बढ़ने पर मामला अपीलीय अदालत पहुंचा, जिसने 9 जून को उम्र के नए सिरे से निर्धारण के निर्देश दिए थे।
वर्ष 2008 का रिकॉर्ड बना मुख्य आधार
बोर्ड के समक्ष नगर निगम के सब रजिस्ट्रार द्वारा पेश रिकॉर्ड में जन्मतिथि 7 अक्टूबर 2007 और पंजीकरण की तारीख 27 फरवरी 2008 दर्ज थी। यह रिकॉर्ड लगभग 18 वर्ष पुराना पाया गया। बोर्ड ने पाया कि 2011 की जन्मतिथि वाला प्रमाण पत्र वर्ष 2018 में विलंबित पंजीकरण प्रक्रिया के जरिए बनवाया गया था। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं:
- स्कूल रिकॉर्ड माता-पिता के हलफनामे पर आधारित था।
- अन्य पहचान दस्तावेजों में जन्म वर्ष 2007 दर्ज पाया गया।
- माता-पिता के बयानों में विरोधाभास सामने आए।
- पुराना रिकॉर्ड निरस्त नहीं किया गया था।
कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण
बोर्ड ने मेडिकल जांच की तुलना में वैधानिक दस्तावेजों को अधिक विश्वसनीय माना। सभी साक्ष्यों की समीक्षा के बाद फैजान को बालिग घोषित कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद तरुण हत्याकांड के मुख्य आरोपित के खिलाफ वयस्क के तौर पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
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