भीलवाड़ा | केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने देश के टेक्सटाइल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
मंत्रालय ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत चौथे राउंड (राउंड-4) का एप्लीकेशन पोर्टल फिर से खोल दिया है।
यह पोर्टल 1 नवंबर से प्रभावी हो गया है। सरकार ने एमएसएमई और मध्यम इकाइयों के अनुकूल नियमों में बदलाव किए हैं।
निवेश और टर्नओवर की शर्तों में बड़ी छूट
केंद्र सरकार ने योजना में निवेश और टर्नओवर की अनिवार्य सीमाओं में भारी कटौती की है।
नए प्रावधानों के तहत अब आवेदन के लिए न्यूनतम निवेश की सीमा घटाकर 50 करोड़ रुपए कर दी गई है।
इसके साथ ही न्यूनतम टर्नओवर की अनिवार्यता को 200 करोड़ रुपए से घटाकर आधा यानी 100 करोड़ रुपए कर दिया गया है।
इंसेंटिव दरें और जेस्टेशन अवधि
योजना के अंतर्गत इंक्रीमेंटल टर्नओवर पर पहले वर्ष में 11 प्रतिशत इंसेंटिव देय होगा।
यह इंसेंटिव प्रतिवर्ष एक-एक प्रतिशत कम होकर पांचवें वर्ष में 7 प्रतिशत रह जाएगा।
योजना में डेढ़ वर्ष की जेस्टेशन अवधि तय की गई है। इस पूरी योजना को वर्ष 2033-34 तक के लिए विस्तारित किया गया है।
राष्ट्रीय वेबिनार में दी गई विस्तृत जानकारी
योजना के नए प्रावधानों को लेकर रविवार को वस्त्र मंत्रालय की ओर से एक विशेष राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया।
इस राष्ट्रीय वेबिनार में देश के प्रमुख औद्योगिक संगठनों ने भाग लिया।
मंत्रालय की संयुक्त सचिव मनीषा चटर्जी ने वेबिनार में योजना के संशोधित प्रारूप की विस्तृत जानकारी साझा की।
इस वेबिनार में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र औद्योगिक संगठन के रूप में 'मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री' ने भाग लिया।
पुराने आवेदकों और नए कोड्स के लिए प्रावधान
पूर्व के फेज-1 से फेज-3 में किए गए निवेश को भी तय शर्तों के साथ मान्यता दी जाएगी।
योजना के पुराने आवेदक नए फेज में आसानी से माइग्रेट हो सकेंगे।
टेक्सटाइल सेक्टर की मांग पर 28 नए एचएसएन कोड शामिल किए जा रहे हैं।
इन नए कोड्स की गजट अधिसूचना अगले 7 से 10 दिनों में जारी होने की संभावना है।
जिन इकाइयों ने पहले आवेदन किया है, वे बाद में भी इन नए कोड को अपने प्रोजेक्ट में जोड़ सकेंगी।
राजस्थान के टेक्सटाइल हब को मिलेगा लाभ
यह योजना मुख्य रूप से मैनमेड फाइबर (एमएमएफ) और टेक्निकल टेक्सटाइल सेक्टर के लिए तैयार की गई है।
21 सितंबर 2021 को शुरू हुई इस योजना की शर्तों में ढील से राज्य के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को लाभ मिलेगा।
विशेष रूप से भीलवाड़ा, जोधपुर, पाली और बालोतरा की टेक्सटाइल इकाइयों को इससे बड़ा संबल मिलेगा।
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