खेती में आत्मनिर्भर किया देश को : हरित क्रांति के जनक महान कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का निधन

हरित क्रांति के जनक महान कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का निधन
MS Swaminathan
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स्वामीनाथन का जन्म 7 अगस्त 1925 को तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुआ था। उन्होंने तिरुवनंतपुरम के महाराजा कॉलेज से जूलॉजी और कोयंबटूर कृषि महाविद्यालय से कृषि विज्ञान में बीएससी की डिग्री हासिल की। उसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से आनुवांशिकी में पीएचडी की।

नई दिल्ली | मशहूर वैज्ञानिक और हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन का 98 वर्ष की आयु में चेन्नई में निधन हो गया। स्वामीनाथन को भारत के खाद्य उत्पादन में क्रांति लाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने उच्च उपज वाली गेहूं और चावल की किस्मों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण देश में अन्न की कमी दूर हुई और भारत आत्मनिर्भर बना।

स्वामीनाथन का जन्म 7 अगस्त 1925 को तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुआ था। उन्होंने तिरुवनंतपुरम के महाराजा कॉलेज से जूलॉजी और कोयंबटूर कृषि महाविद्यालय से कृषि विज्ञान में बीएससी की डिग्री हासिल की। उसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से आनुवांशिकी में पीएचडी की।

स्वामीनाथन ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) से की, जहां उन्होंने आलू की खेती पर शोध किया। 1961 में उन्हें IARI का निदेशक नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने उच्च उपज वाली गेहूं और चावल की किस्मों को विकसित करने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम शुरू किया।

1966 में, स्वामीनाथन ने मैक्सिको से गेहूं के बीज प्राप्त किए और उन्हें भारत की घरेलू किस्मों के साथ संकरण कराकर उच्च उपज देने वाली गेहूं की नई किस्में विकसित कीं। इन नई किस्मों को गेहूं की हरित क्रांति के रूप में जाना गया। इसी तरह, उन्होंने चावल की उच्च उपज देने वाली किस्मों को भी विकसित किया।

स्वामीनाथन के नेतृत्व में हुए हरित क्रांति के परिणामस्वरूप भारत में खाद्य उत्पादन में भारी वृद्धि हुई और देश अन्न की कमी से मुक्त हुआ। हरित क्रांति के कारण भारत को दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश का दर्जा भी प्राप्त हुआ।

स्वामीनाथन ने कृषि के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किए। उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत रत्न जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

स्वामीनाथन कृषि के क्षेत्र में अपने काम के अलावा पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के लिए भी सक्रिय रूप से काम करते रहे। उन्होंने 1982 में एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की, जिसके माध्यम से वे कृषि में सतत विकास और ग्रामीण विकास के लिए काम करते रहे।

स्वामीनाथन को एक महान वैज्ञानिक और दूरदर्शी के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में अपने काम से भारत और दुनिया को बदल दिया।

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