सिरोही | राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आज सिरोही के दौरे पर रहते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एक विस्तृत प्रेस वार्ता में राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किए।
जूली ने कहा कि राजस्थान में आज कानून व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है और जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।
उन्होंने सिरोही के स्थानीय कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर सरकार को भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता के मुद्दों पर घेरने का काम किया।
कानून व्यवस्था और बढ़ते सड़क हादसों पर सवाल
टीकाराम जूली ने प्रदेश में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज राजस्थान अपराधों का गढ़ बनता जा रहा है।
चोरी, डकैती, बलात्कार और सरेआम गोलीबारी की घटनाएं अब प्रदेश में आम बात हो गई हैं, जिससे भय का माहौल है।
उन्होंने सरकार को उनके वादों की याद दिलाते हुए कहा कि 'ब्लैक स्पॉट' चिन्हित करने के दावे केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं।
सड़क हादसों में आज पूरे के पूरे परिवार खत्म हो रहे हैं, लेकिन सरकार के पास इन दुर्घटनाओं को रोकने की कोई ठोस योजना नहीं है।
पुलिस प्रशासन केवल आंकड़ों की बाजीगरी में उलझा हुआ है और धरातल पर अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
बाड़मेर रिफाइनरी: विकास की जगह विनाश?
जूली ने बाड़मेर रिफाइनरी प्रोजेक्ट की बदहाली के लिए भाजपा की 'डबल इंजन' सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
उन्होंने याद दिलाया कि इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का शिलान्यास पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने बड़े विजन के साथ किया था।
पिछली भाजपा सरकार ने राजनीतिक द्वेष के चलते 5 साल तक काम रोके रखा, जिससे इसकी लागत 37 हजार करोड़ से 80 हजार करोड़ पहुंच गई।
इस देरी की वजह से न केवल प्रदेश के खजाने पर बोझ पड़ा, बल्कि लाखों युवाओं से उनके रोजगार के अवसर भी छिन गए।
रिफाइनरी में हाल ही में लगी आग पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यह इतिहास की पहली रिफाइनरी है जो शुरू होने से पहले ही जल गई।
"कानून मंत्री कहते हैं कि आग लगना भगवान को मंजूर नहीं था, जबकि हकीकत यह है कि भगवान खुद इस भ्रष्ट सरकार को काम करते नहीं देखना चाहते।"
जूली ने आरोप लगाया कि एक छोटे अधिकारी को सस्पेंड करना केवल लीपापोती है, जबकि असली जिम्मेदारी बड़े मंत्रियों और अधिकारियों की होनी चाहिए।
महिला आरक्षण: हक या महज चुनावी धोखा?
महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए जूली ने केंद्र की मोदी सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए और इसे एक बड़ा राजनीतिक स्टंट बताया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण की पक्षधर रही है, जबकि भाजपा ने अतीत में हमेशा इसका विरोध करने का काम किया है।
साल 2023 में जब यह बिल पास हुआ, तो भाजपा ने चालाकी से इसमें जनगणना और परिसीमन की नई शर्तें जोड़कर इसे सालों के लिए टाल दिया।
जूली ने आरोप लगाया कि नई जनगणना में एससी, एसटी और ओबीसी की आबादी बढ़ी है, जिसे भाजपा आरक्षण के दायरे में नहीं लाना चाहती।
परिसीमन के नाम पर भाजपा निकाय चुनावों की तरह ही विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में भी धांधली करने की योजना बना रही है।
उन्होंने प्रज्वल रेवन्ना और बृजभूषण शरण सिंह जैसे उदाहरण देते हुए भाजपा को महिलाओं के अधिकारों का विरोधी करार दिया।
सिरोही के स्थानीय भूमि घोटाले और भ्रष्टाचार
स्थानीय मुद्दों पर आते हुए जूली ने सिरोही प्रशासन को 'प्रॉपर्टी डीलर' की संज्ञा दी और कई बड़े जमीन घोटालों का कच्चा चिट्ठा खोला।
नगर परिषद भूमि घोटाले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि खसरा नंबर 1300 और 1298 की बेशकीमती जमीन को अधिकारियों ने मिलीभगत कर बेच दिया।
राम झरोखा मंदिर की जमीन के मामले में उन्होंने कहा कि विधानसभा में स्पष्ट जवाब के बावजूद नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
लालवेरा की सार्वजनिक भूमि पर हो रहे अवैध कब्जों और उनकी बिक्री पर भी उन्होंने जिला प्रशासन से जवाब मांगा है।
पुराना चुंगी नाका के पास की सरकारी संपत्ति को एक खास व्यापारी को लाभ पहुंचाने के लिए देने के मामले में भी उन्होंने जांच की मांग की।
जहरीला केमिकल और पर्यावरण से खिलवाड़
जूली ने सिरोही में गुजरात से लाए जा रहे जहरीले केमिकल के मुद्दे को उठाते हुए इसे जनता के स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि 'कमलेश मेटाकास्ट' जैसी कंपनियों द्वारा जमीन और कुओं में खतरनाक एसिड डाला जा रहा है, जिससे भूजल पेट्रोल जैसा हो गया है।
इस मामले में किसी बड़े भाजपा नेता की संलिप्तता का अंदेशा जताते हुए उन्होंने कहा कि इसीलिए आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो रही है।
जूली ने मांग की कि ऐसे लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए जो जनता के पीने के पानी को जहरीला बना रहे हैं।
लोकतंत्र की हत्या और पंचायती राज में देरी
पंचायती राज चुनावों में हो रही देरी पर जूली ने कहा कि सरकार अपनी संभावित हार के डर से चुनाव कराने से भाग रही है।
उन्होंने कहा कि आईबी की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा निकाय और पंचायत चुनावों में बुरी तरह हारने वाली है, इसलिए लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।
भरतपुर जिला प्रमुख का पद ढाई साल से खाली रहने का उदाहरण देते हुए उन्होंने सरकार की प्रशासनिक कुशलता पर सवालिया निशान लगाए।
पंचायती राज की शुरुआत करने वाली कांग्रेस पार्टी इन संस्थाओं को मजबूत करना चाहती है, जबकि भाजपा इन्हें खत्म करने पर तुली हुई है।
मनरेगा मजदूरों के साथ हो रहा अन्याय
गरीबों और मजदूरों के हक की बात करते हुए जूली ने कहा कि भाजपा सरकार उद्योगपतियों की गोद में बैठी है और मजदूरों का खून चूस रही है।
दिसंबर महीने से मनरेगा मजदूरों का भुगतान अटका हुआ है और नए जॉब कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
मजदूरों की संख्या में 90 प्रतिशत तक की कटौती कर दी गई है और अपने हक के लिए आवाज उठाने वालों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं।
न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी न करना और महंगाई को बेलगाम छोड़ देना भाजपा की गरीब विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
भाजपा की अंतर्कलह और आगामी चुनाव
विपक्ष की भूमिका पर जूली ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस हर मोर्चे पर मजबूती से लड़ रही है और सरकार की नाकामियों को जनता तक पहुंचा रही है।
उन्होंने भाजपा के भीतर चल रही गुटबाजी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वसुंधरा राजे जैसे वरिष्ठ नेताओं को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।
सरकार में संवाद की इतनी कमी है कि विधायक की मंत्री नहीं सुनता और मंत्री की बात मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंच पा रही है।
अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में जनता इस तानाशाही सरकार को उखाड़ फेंकेगी और कांग्रेस भारी बहुमत से वापसी करेगी।
टीकाराम जूली का यह कड़ा रुख बताता है कि आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में और भी गरमाहट देखने को मिलेगी।
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