महासंघ ने दी आंदोलन की चेतावनी: राज्य सरकार की वादाखिलाफी पर कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश

राज्य सरकार की वादाखिलाफी पर कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश
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विधानसभा चुनावों में व्यस्त गहलोत सरकार को राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। महासंघ का आरोप है कि राज्य सरकार कर्मचारियों के साथ वादा खिलाफी कर रही है।

जयपुर | विधानसभा चुनावों में व्यस्त गहलोत सरकार को राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। 

महासंघ का आरोप है कि राज्य सरकार कर्मचारियों के साथ वादा खिलाफी कर रही है। सरकार बजट घोषणाओं को लागू नहीं कर प्रदेश के 8 लाख कर्मचारियों को धोखा दे रही है। जिसके चलते कर्मचारियों में जबर्दस्त आक्रोश है। 

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष आयुदान सिंह कविया तथा संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक महावीर प्रसाद शर्मा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार कर्मचारियों से संवाद नहीं कर रही है एवं लिखित समझौते कर लागू नहीं कर रही है। 

सरकार में नौकरशाही चुने हुए प्रतिनिधियों पर भारी पड रही है।  जिसके कारण राज्य सरकार की कर्मचारी हितैषी होने की अवधारणा पर प्रश्न चिन्ह लग रहा हैं। 

संघर्ष संयोजक ने कहा कि यदि पीएफआरडीए बिल वापस नहीं हुआ तो ओपीएस भी छिन जायेगी।

वर्तमान सरकार सत्तारूढ़ होने से पूर्व जन घोषणा पत्र में किए गए वादों से विमुख हो गई है जिससे कर्मचारी अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहा है।

राज्य सरकार पुर्नगठन के नाम पर निरंतर पद विलोपित करती जा रही है जो प्रदेश के युवा, शिक्षित एवं प्रशिक्षित बेरोजगारों के साथ अन्याय है। लाखों संविदा कार्मिकों को नियमित करने के नाम पर नए संविदा नियम 2022 में ही उलझा कर रख दिया है। एक भी संविदा कार्मिक को नियमित नही किया गया है । यह लाखों युवा संविदा कार्मिकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

 प्रदेश संघर्ष संयोजक महावीर शर्मा ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री महोदय तथा शासन के उच्च अधिकारियों को विगत 4 वर्षाे से लगातार ज्ञापन देकर कर्मचारियों की प्रशासनिक व वित्तीय मांगों के निराकरण के लिए बार-बार अनुरोध किया जाता रहा है लेकिन सरकार द्वारा महासंघ के मांग पत्र पर एक बार भी द्विपक्षीय वार्ता नही की गई ।

सरकार पर आरोप है कि महासंघ के 15 सूत्री मांग पत्र की एक भी मांग पर आदेश जारी नहीं हुए। 

महासंघ के 82 घटक संगठनों के लाखों कर्मचारियों द्वारा बजट सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव कर 23 जनवरी, 2023 को विशाल आक्रोश रैली आयोजित की गई जिसके उपरांत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा स्वयं ज्ञापन लेकर मांगों के समाधान के अधिकारियों को निर्देश दिए गए, लेकिन इसके पश्चात भी किसी भी मांग पर आदेश जारी नहीं होना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

अब महासंघ के विभिन्न घटक संगठनों के पदाधिकारिया ने आज एक स्वर में निर्णय किया कि यदि आगामी सात दिनों में शासन एवं सरकार द्वारा हमारे 15 सूत्री मांग पत्र, लिखित समझौतों तथा बजट घोषणाओं को लागू नहीं किया गया तो महासंघ द्वारा विवश होकर आर-पार का आंदोलन किया जाएगा।

अब अगर सरकार इन बजट घोषणाएं को लागू नहीं करेगी तो महासंघ के लाखों कर्मचारी सरकार की विभिन्न बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। जिसकी जिम्मेदारी शासन और सरकार की होगी।

 कर्मचारी महासंघ की मुख्य मांगें 

1 - कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर कर वर्ष 2013 की अनुसूची 5 के अनुसार सातवें वेतन आयोग में वेतन निर्धारण किया जावे। कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 26000 किया जावे।
2 - 9,18 एवं 27 वर्ष की सेवा पर मुख्यमंत्री की बजट घोषणा संख्या 155 के अनुसार एसीपी के स्थान पर 7,14,21, एवं 28 वर्ष की सेवा पर पदोन्नति पद का वेतनमान स्वीकृत किया जावे।  

3 - विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा किए गए समझौतों एवं सहमतियों को लागू किया जावे।

4 - सहायक कर्मचारियों को एमटीएस घोषित किया जावे।

5 - नियमित पदों पर संविदा कार्मिकों के भर्ती के लिए जारी संविदा नियम 2022 को प्रत्याहारित कर रिक्त पदों पर नियुक्त संविदा कार्मिकों/अस्थाई कार्मिकों को नियमित किया जावे।

6 - जनवरी 2019 से जून, 2021 तक का महंगाई भत्ता स्वीकृत किया जावे। 

7 - प्रदेश में लागू की गई पुरानी पेंशन योजना के पश्चात कर्मचारियों के एनपीएस में कटौती की गई राशि जीपीएफ खाते में स्थानांतरित की जावे।

8 - प्रदेश के मंत्रालयिक कर्मचारियों को शासन सचिवालय के समान वेतन भत्ते स्वीकृत किए जावे।

9 - कर्मचारी संगठनों के धरना प्रदर्शन पर रोक के लिए सरकार द्वारा अलोकतांत्रिक निर्णय कर जारी किए गए नो वर्क नो पे के आदेश दिनांक 05.10.2018 को प्रत्याहरित किया जावे।

ऐसे रहेंगे आंदोलन के चरण 

- प्रथम चरण में 21 अगस्त सोमवार को प्रदेश कार्यकारिणी के द्वारा माननीय मुख्य सचिव को आंदोलन का ज्ञापन।

- द्वितीय चरण में 29 अगस्त 2023 को जिला कार्यकारिणियों के द्वारा जिला कलेक्टर को मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन एवं प्रदर्शन।

- तृतीय चरण में सितंबर के प्रथम सप्ताह में प्रदेश की राजधानी जयपुर में शहीद स्मारक पर विशाल धरना एवं आंदोलन के आगामी चरणों की घोषणा।

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