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ट्रंप का ईरान पर बड़ा यू-टर्न: ट्रंप का ईरान पर बड़ा यू-टर्न, नाकाबंदी जारी रहेगी

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 25 मई 2026, 11:06 दोपहर
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति समझौते में जल्दबाजी से इनकार किया और नाकाबंदी जारी रखने का फैसला किया।

वाशिंगटन | अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तीन महीने पुराने युद्ध के बीच एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ होने वाले संभावित समझौते को लेकर बड़ा यू-टर्न लिया है।

ट्रंप प्रशासन ने उन सभी उम्मीदों को कम कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि दोनों देशों के बीच जल्द ही कोई शांति समझौता हो सकता है। अब स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।

बातचीत की मेज पर ट्रंप का नया रुख

डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को अपने प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ईरान के साथ किसी भी तरह की डील में कोई जल्दबाजी न की जाए। उन्होंने इसे लेकर अपनी रणनीति साफ कर दी है।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि दोनों पक्षों को अपना समय लेना चाहिए। ट्रंप चाहते हैं कि चीजों को सही तरीके से और अमेरिकी हितों को ध्यान में रखकर किया जाए।

यह बयान शनिवार को लगाई जा रही उन अटकलों के बिल्कुल विपरीत है, जिनमें एक आसन्न सफलता की उम्मीद जताई गई थी। कूटनीतिक गलियारों में इस बदलाव से काफी हैरानी देखी जा रही है।

"मैंने अपने प्रतिनिधियों को स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ समझौते में कोई जल्दबाजी न करें। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हमारी नाकाबंदी तब तक पूरी ताकत से लागू रहेगी जब तक डील पक्की नहीं हो जाती। हमें अपना समय लेना चाहिए और इसे सही करना चाहिए। क्रिटिक्स लूजर्स हैं!"

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी रहेगी नाकाबंदी

ट्रंप ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि जब तक कोई अंतिम समझौता हस्ताक्षरित और प्रमाणित नहीं हो जाता, तब तक ईरान पर अमेरिकी दबाव कम नहीं होगा। यह एक बड़ा फैसला है।

उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी जहाजों पर अमेरिकी नाकाबंदी पूरी ताकत और प्रभाव के साथ लागू रहेगी। यह जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

यह नाकाबंदी ईरान की अर्थव्यवस्था और उसके तेल निर्यात के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रही है। अमेरिका इसे अपनी सबसे मजबूत सौदेबाजी की ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाकाबंदी से ईरान पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है। ट्रंप प्रशासन इस दबाव को कम करने के मूड में फिलहाल बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा है।

ईरान के आरोप और जमे हुए फंड्स का मामला

दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका पर शांति वार्ता में जानबूझकर बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाया है। ईरान इस समय काफी आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

ईरान का कहना है कि जमे हुए फंड्स और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर अमेरिका जानबूझकर प्रगति को रोक रहा है। इससे बातचीत का माहौल लगातार खराब होता जा रहा है।

ईरान लगातार मांग कर रहा है कि समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबंधों में ढील दी जाए। साथ ही उसके अटके हुए पैसे उसे वापस सौंपे जाने की शर्त रखी गई है।

परमाणु बम की ओर ईरान की चेतावनी

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और युद्ध की आशंका और गहरी हो गई है। ईरान ने अब एक बहुत ही गंभीर चेतावनी जारी की है।

ईरान ने कहा है कि अगर उस पर कोई भी हमला हुआ, तो वह यूरेनियम को सीधा 90% तक शुद्ध कर देगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसका सीधा मतलब परमाणु बम बनाने की तैयारी है।

एक बार 60% संवर्धन हासिल करने के बाद 90% यानी वेपंस ग्रेड तक पहुंचने में केवल कुछ ही दिन लगते हैं। ईरान की इस धमकी से वाशिंगटन से लेकर यरूशलम तक खलबली है।

ईरान के संसदीय आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने भी साफ कर दिया है कि किसी भी हमले की स्थिति में ईरानी संसद तुरंत 90% यूरेनियम संवर्धन को मंजूरी दे देगी।

आलोचकों को ट्रंप का करारा जवाब

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने उन आलोचकों पर भी तीखा पलटवार किया है जो उनकी रणनीति पर सवाल उठा रहे थे। ट्रंप ने अपनी कार्यशैली को बिल्कुल सही बताया है।

ट्रंप ने ऐसे लोगों को 'लूजर्स' करार देते हुए कहा कि अमेरिका अपने हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। उनका यह आक्रामक रुख उनकी भविष्य की योजनाओं को दर्शाता है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह यू-टर्न वास्तव में दबाव की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। वे बातचीत की मेज पर ईरान से अधिक रियायतें चाहते हैं।

वे समय सीमा को जानबूझ कर टाल रहे हैं ताकि ईरान घुटने टेकने पर मजबूर हो जाए। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि ईरान अगला कदम क्या उठाएगा।

क्या ईरान इस अमेरिकी नाकाबंदी का सैन्य जवाब देगा, या फिर रुकी हुई बातचीत को दोबारा शुरू करने के लिए कोई नया प्रस्ताव पेश करेगा? यह देखना काफी दिलचस्प होगा।

आगामी दिनों में मध्यस्थ देशों की भूमिका बहुत अहम हो जाएगी। मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदें अब पूरी तरह से ट्रंप की अगली चाल और ईरान के धैर्य पर टिकी हुई हैं।

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