राजस्थान

तूरा गांव में जन्माष्टमी की धूम: तूरा में जन्माष्टमी महोत्सव, 5000 भक्त हुए शामिल

Pradeep Beedawat · 07 सितम्बर 2026, 09:35 सुबह
तूरा गांव में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का भव्य महोत्सव मनाया गया, जिसमें 5000 से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। रतन सिंह राठौड़ के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में पूरे गांव ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

तूरा | श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर तूरा गांव में आस्था, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। गांव की गलियां भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठीं। राजस्थान राजपूत समाज, मुंबई-महाराष्ट्र के चेयरमैन श्री रतन सिंह राठौड़ तूरा और दादोसा श्री मोती सिंह राठौड़ तूरा के सान्निध्य में आयोजित इस भव्य जन्माष्टमी महोत्सव में पूरा गांव एक परिवार की तरह सहभागी बना।

आस्था और भक्ति का संगम

महोत्सव के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण कन्हैया की प्रतिमा को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ राठौड़ परिवार के घर लाया गया।

कान्हा के आगमन को लेकर परिवार के सदस्यों के साथ ही ग्रामवासियों में भी विशेष उत्साह दिखाई दिया।

श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर परिवार, गांव और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

जन्माष्टमी के इस आयोजन ने पूरे तूरा गांव को कृष्णभक्ति के रंग में रंग दिया। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग पारंपरिक परिधानों में कार्यक्रम में पहुंचे।

पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति

आयोजकों के अनुसार, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में तूरा गांव और आसपास के क्षेत्रों से पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

इतनी बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति के बावजूद सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं।

स्वागत-सत्कार और सामूहिक भोजन

राठौड़ परिवार की ओर से कार्यक्रम में पहुंचे समस्त ग्रामवासियों, अतिथियों और श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत एवं सत्कार किया गया।

सभी के लिए बड़े स्तर पर सामूहिक भोजन की व्यवस्था भी की गई। परिवार के सदस्यों और ग्रामीण कार्यकर्ताओं ने अतिथियों के स्वागत से लेकर भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं तक की जिम्मेदारी संभाली।

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन मानवता के लिए प्रेरणा: रतन सिंह राठौड़

राजस्थान राजपूत समाज, मुंबई-महाराष्ट्र के चेयरमैन श्री रतन सिंह राठौड़ तूरा ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म, कर्तव्य, प्रेम, सत्य और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जन्माष्टमी का यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि पूरे गांव को प्रेम और भाईचारे के सूत्र में जोड़ने का माध्यम भी है।

उन्होंने आगे कहा, “भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से जन्माष्टमी महोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में पांच हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति हमारे गांव की एकता और धार्मिक आस्था को दर्शाती है।”

रतन सिंह राठौड़ ने कहा कि ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से जोड़ते हैं।

उन्होंने युवाओं से भगवान श्रीकृष्ण के कर्मयोग और कर्तव्यनिष्ठा के संदेश को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

सामाजिक एकता का भी बना उदाहरण

जन्माष्टमी महोत्सव धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक एकता और सामूहिक सहयोग का उदाहरण भी बना।

ग्रामीणों ने अलग-अलग व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली। किसी ने श्रद्धालुओं के स्वागत में सहयोग किया तो किसी ने भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं में अपनी सेवाएं दीं।

पूरे गांव की सहभागिता के कारण यह आयोजन एक विशाल पारिवारिक उत्सव जैसा दिखाई दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य

कार्यक्रम में राठौड़ परिवार के कई सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

परिवार के सदस्यों ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर गांव और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। उन्होंने आयोजन में आए श्रद्धालुओं का स्वागत किया और विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग करने वाले ग्रामीणों एवं कार्यकर्ताओं के प्रति आभार प्रकट किया।

भक्ति, उल्लास और सामाजिक समरसता से परिपूर्ण वातावरण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव शुभ एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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