भोपाल | एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने मीडिया और दोनों पक्षों को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की नसीहत दी है। अदालत ने कहा कि जांच को कानून के हिसाब से चलने देना चाहिए। सीजेआई ने मीडिया से अपील की कि वे परिवारों के बयानों के पीछे न भागें और जांच प्रक्रिया का सम्मान करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है।
कोर्ट की मीडिया और पक्षों को नसीहत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़ित और आरोपी दोनों को जांच में सहयोग करना चाहिए ताकि सच सामने आ सके। कोर्ट को राज्य एजेंसियों या सीबीआई की कार्यप्रणाली पर कोई शक नहीं है।
हम अपने मीडिया के दोस्तों से गुजारिश करेंगे कि वे पीड़ित परिवार या दूसरे परिवार के बयानों के पीछे न भागें। चीजों को कानून और प्रक्रिया के हिसाब से ही आगे बढ़ने दें।
सास और पति पर गंभीर आरोप
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मृतक की सास पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वे अलग-अलग चैनलों पर जाकर मृतका की छवि खराब करने की कोशिश कर रही हैं।
वहीं, पति समर्थ सिंह फिलहाल 7 दिन की पुलिस रिमांड पर है। समर्थ ने पूछताछ में दावा किया कि प्रेग्नेंसी की पुष्टि के बाद ट्विशा के व्यवहार में काफी बदलाव आ गया था।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सास गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई होनी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसमें देरी होने की संभावना जताई गई है।
पोस्टमॉर्टम और जांच के उलझे सवाल
दिल्ली एम्स की टीम ने शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया है। रिपोर्ट आने में अभी वक्त लगेगा क्योंकि विसरा और हिस्टोपैथोलॉजी के नमूनों का विश्लेषण होना बाकी है।
जांच में कई विसंगतियां सामने आई हैं। गले पर दोहरे निशान, फंदे की बरामदगी में देरी और मृतका की लंबाई को लेकर परिजन और पुलिस की रिपोर्ट अलग-अलग है।
परिजन का आरोप है कि ट्विशा के शरीर पर चोट के निशान थे। पहली रिपोर्ट में हायॉइड बोन को सुरक्षित बताया गया था, जिसकी अब दोबारा सूक्ष्म जांच की जा रही है।
यह मामला अब कानूनी और मेडिकल उलझनों में फंसता नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद है कि जांच में पारदर्शिता आएगी और ट्विशा को न्याय मिलेगा।
*Edit with Google AI Studio