लोकसभा चुनाव: दो मुख्यमंत्री जिनका यह आखिरी चुनाव हो सकता है

दो मुख्यमंत्री जिनका यह आखिरी चुनाव हो सकता है
अब तक रहे बेदाग मुख्यमंत्री
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Highlights

दो प्रदेशों के सीएम का यह आखिरी लोकसभा चुनाव होने वाला है

दोनों पर कभी भ्रष्टाचार, परिवारवाद का आरोप नहीं लगा

बीजद के प्रमुख नवीन पटनायक ने 5 मार्च 2000 को ओडिशा के सीएम के रूप में कार्यभार संभाला

18 वर्ष से नीतीश सीएम हैं, उन्होंने बिहार को अपने पहले कार्यकाल में सुधारा

नई दिल्ली | 4 जून को देश में किसकी सरकार बनेगी यह कहना अभी मुश्किल है लेकिन यह लगभग तय हो गया है कि दो प्रदेशों के सीएम (CM) का यह आखिरी लोकसभा चुनाव होने वाला है। इन दोनों नेताओं ने लंबे समय तक अपने राज्य में सत्ता चलायी, अच्छे से जिम्मेदारियां निभाईं, राज्य को पुराने झंझट से निकाला।

एक सीएम (CM) पिछले 24 साल से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है तो दूसरा लगभग 18 वर्षों से बेदाग रूप से काम करता आ रहा है। दोनों पर कभी भ्रष्टाचार, परिवारवाद का आरोप नहीं लगा। दोनों ने राज्य को विकास की पटरी पर लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। जो है ओडिशा के सीएम (CM) नवीन पटनायक और बिहार के सीएम  (CM) नीतीश कुमार।

बीजद प्रमुख नवीन पटनायक

बीजद (BJD) के प्रमुख नवीन पटनायक ने 5 मार्च 2000 को ओडिशा के सीएम (CM) के रूप में कार्यभार संभाला और तब से लेकर अब तक वो राज्य के सीएम (CM) बने हुए हैं। 24 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने राज्य में स्वास्थय, शिक्षा, रोजगार के अवसरों के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।

दोस्तों के बीच पप्पू नाम से मशहूर नवीन अपने शुरूआती जीवन में राजनीति (Politics) से दूर रहे। लेकिन पिता के निधन के बाद, उन्होंने 1997 में राजनीति (Politics) में प्रवेश किया और ओडिशा के अस्का संसदीय क्षेत्र से 11वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में चुने गए। तब से लेकर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

लगातार जनता का आर्शीवाद मिलता गया जो भारतीय राजनीति (indian politics) में दुर्लभ है। इन्होंने राज्य की जनता के लिए जो काम किया, उसका आर्शीवाद भी उन्हें भरपूर प्राप्त हुआ। अपनी पार्टी को नवीन नई ऊचांईयों पर ले गए। कांग्रेस (INC) हो या बीजेपी (BJP), नवीन ने दोनों दलों से अच्छा संबंध रखा ताकि राज्य के विकास में रुकावट पैदा न हो।

16 अक्टूबर 1946 को जन्में नवीन पटनायक ने अपने राज्य को बहुत कुछ दिया। इनके कार्यकाल में राज्य ने शानदार विकास किया। लेकिन अब नवीन की तबीयत जिस प्रकार की रह रही है उसे देखकर कहा जा सकता है कि उनके रिटायर (retire) होने का समय आ गया है।

नवीन खुद से चल नहीं पाते, उन्हें चलने में दो लोगों का सहारा लेना पड़ता है। यह बात हर कोई जानता है कि ओडिशा में सरकार अब नवीन नहीं बल्कि पूर्व आईएस (IS) अधिकारी वीके(VK) पाण्डियन चलाते हैं।

इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा(BJP) पूरी तैयारी के साथ ओडिशा में उतरी है और बीजद को कड़ी मिलने की उम्मीद है। PM मोदी से लेकर अमित शाह तक सभी नवीन पटनायक पर जमकर हमला बोल रहें हैं। अगर इस चुनाव में बीजद हार जाती है तो इसे नवीन पटनायक की लंबी राजनीतिक करियर (political career) का अंत माना जाएगा।

नीतीश कुमार

आने वाले कई दशकों तक जब भी यह प्रश्न आएगा कि बिहार को रहने लायक किसने बनाया? गुंडाराज, अपहरण, फिरौती, भ्रष्टाचार के दौर से किसने निकाला? चौपट शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर किसने लाया? शहाबुद्दीन, साधु यादव जैसे माफिया के राज का अंत किसने किया?  इन सवालों का एक जवाब है- नीतीश कुमार।

अन्यथा बिहार ने तो वो दौर भी देखा जब कार के शोरूम लूट लिए जाते थे और पुलिस एफआईआर (FIR) भी दर्ज नहीं करती थी। सत्ता द्वारा पालतू माफियों का ऐसा बोलबाला था कि प्रदेश में 8-10 समानांतर सरकारें चलती थी। कोई भी चुनाव बिना जातिय हिंसा के संपन्न नहीं होता था। सत्ता पक्ष के उम्मीदवार के खिलाफ आवाज उठाना मतलब शाम को अपनी अर्थी उठवाने जैसा होता था।

नीतीश कुमार ने इन सभी परेशानियों से बिहार को बाहर निकाला। अपना पहले कार्यकाल में उन्होंने ऐतिहासिक (historical) काम किया। बिहार को रहने लायक बनाया। बिहार की जनता ने भी इनके काम का मान रखा और लगातार लालू परिवार को बिहार की सत्ता से दूर रखा।

नीतीश कुमार के आने के बाद ही बिहार में काम कागज से निकलकर धरातल पर होना शुरू हुआ। गांव-गांव बिजली पहुंची, गुंडों पर नियंत्रण शुरू हुआ।

लगभग पिछले 18 वर्ष से नीतीश सीएम (CM) हैं, उन्होंने बिहार को अपने पहले कार्यकाल में सुधारा, लेकिन 2010 के बाद बिहार के विकास को लेकर उनका ध्यान केंद्र से हिल गया। इस कारण बिहार को काफी नुकसान हुआ। आज भी बिहार के युवा नौकरी की तलाश में परेशान होकर इधर-उधर भटकते हैं।

बिहार से जाने वाली ट्रेनों (Trains) में सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। अन्य राज्यों में बिहार के लोगों को औसत दर्जे का का नागरिक समझा जाता है। इन सब कारणों के लिए भी मौजूदा सरकार की गलत नीतियों को जिम्मेदार माना जा सकता है।

पिछले विधानसभा चुनाव (assembly elections) में उन्होंने कहा था कि यह हमारा आखिरी चुनाव है, हमने आपके लिए इतना कुछ किया है, आखिरी बार हमारा साथ दे दिजिए। हाल के दिनों में नीतीश जिस तरह का बयान दे रहे हैं उसे देखकर लगता है कि उनके रिटायर (Retire) होने का समय आ गया है।

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