उदयपुर | राजस्थान के उदयपुर स्थित आरएनटी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत का एक अद्भुत उदाहरण पेश किया है। यहां के कार्डियोथोरेसिक सर्जनों ने एक 32 वर्षीय युवक के सीने में घुसे 9 इंच लंबे लोहे के पाइप को निकालकर उसे नया जीवन दिया है। यह घटना न केवल चिकित्सा कौशल को दर्शाती है, बल्कि आधुनिक तकनीक और त्वरित निर्णय के महत्व को भी रेखांकित करती है।
भीषण सड़क हादसे का शिकार हुआ युवक
भीलवाड़ा निवासी युवक अपनी बाइक से एक ट्रक के पीछे चल रहा था, जिसमें टेंट का सामान लदा था।
अचानक ट्रक चालक द्वारा ब्रेक लगाने से लोहे का एल-आकार का पाइप खिसककर सीधे युवक के सीने में धंस गया।
पाइप पसलियों को तोड़ते हुए फेफड़े को चीरकर गर्दन तक जा पहुंचा था, जिससे मरीज की स्थिति नाजुक हो गई।
अत्यधिक रक्तस्राव और फेफड़ों में गंभीर चोट के कारण युवक को तुरंत उदयपुर के अस्पताल रेफर किया गया था।
जटिल सर्जरी और डॉक्टरों की सूझबूझ
रेडियोलॉजी विभाग के सीटी स्कैन में पता चला कि पाइप ने सबक्लेवियन आर्टरी जैसी प्रमुख रक्त वाहिकाओं को क्षतिग्रस्त किया था।
इसके बाद डॉ. विनय नैथानी के नेतृत्व में आपातकालीन ऑपरेशन का निर्णय लिया गया ताकि जीवन बचाया जा सके।
सर्जिकल टीम ने सावधानीपूर्वक पाइप को बाहर निकाला और क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं की अत्यंत जटिल वैस्कुलर रिपेयरिंग की।
डॉक्टरों ने फेफड़े की मरम्मत और टूटी हुई पसलियों का पुनर्निर्माण कर आंतरिक रक्तस्राव को पूरी तरह नियंत्रित किया।
यह मामला बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि पाइप महत्वपूर्ण अंगों के करीब था। समय पर अस्पताल पहुंचने से हम उसकी जान बचा सके।
रिकवरी और चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है और वह अब सामान्य आहार ले रहा है।
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राहुल जैन ने इस सफलता के लिए पूरी सर्जिकल और एनेस्थीसिया टीम की सराहना की है।
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि दुर्घटना में शरीर में धंसी वस्तु को स्वयं निकालने का प्रयास कभी न करें।
उदयपुर के डॉक्टरों की इस उपलब्धि ने सरकारी अस्पतालों की कार्यक्षमता पर जनता का विश्वास एक बार फिर मजबूत किया है।
भीलवाड़ा का यह युवक अब मौत के मुंह से लौटकर अपने परिवार के पास सुरक्षित है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं।
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