thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजस्थान

उदयपुर स्कूल हादसा: करणी सेना का हंगामा: उदयपुर स्कूल हादसा: आधी रात थाने में करणी सेना का हाई-वोल्टेज ड्रामा, प्रिंसिपल की पेशी और मुआवजे पर बनी सहमति

गणपत सिंह मांडोली

उदयपुर के सेंट एंथोनी स्कूल में हैंडबॉल पोल गिरने से एक मासूम की मौत के बाद करणी सेना ने थाने का घेराव किया। भारी दबाव के बाद प्रिंसिपल को आधी रात थाने बुलाया गया और मुआवजे पर सहमति बनी।

HIGHLIGHTS

  • उदयपुर के सेंट एंथोनी स्कूल में हैंडबॉल पोल गिरने से 8 वर्षीय मासूम की दर्दनाक मौत हो गई।
  • करणी सेना और राजपूत समाज के सैकड़ों लोगों ने गोवर्धन विलास थाने का घेराव कर हंगामा किया।
  • पुलिस ने आधी रात को स्कूल के प्रिंसिपल विलियम डिसूजा को पूछताछ के लिए थाने बुलाया।
  • मानवाधिकार आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।
udaipur school accident karni sena protest principal summoned

उदयपुर | राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ एक नामी स्कूल की लापरवाही ने एक हँसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया।

दर्दनाक हादसे की शुरुआत

गोवर्धन विलास इलाके में स्थित सेंट एंथोनी स्कूल में सोमवार का दिन किसी काल की तरह आया। यहाँ स्कूल परिसर में खेल के मैदान में बच्चे रोजाना की तरह खेल रहे थे। इन्ही बच्चों के बीच 8 साल का एक मासूम भी था जो अपने भविष्य के सपने बुन रहा था। खेलते समय अचानक मैदान में लगा एक भारी-भरकम हैंडबॉल पोल उखड़ गया। यह पोल सीधा उस मासूम बच्चे के ऊपर जा गिरा। पोल इतना वजनी था कि बच्चे को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

इकलौते बेटे की मौत से मातम

हादसे के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में बच्चे को अस्पताल ले जाया गया। लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। मृतक बच्चा अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। इस खबर के मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

करणी सेना का थाने पर धावा

हादसे की खबर जैसे ही शहर में फैली, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। मंगलवार रात को करणी सेना और राजपूत समाज के सैकड़ों लोग गोवर्धन विलास थाने पहुँच गए। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। देखते ही देखते थाना परिसर छावनी में तब्दील हो गया। लोग न्याय की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे।

आधी रात को हाई-वोल्टेज ड्रामा

प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना अधिक था कि वे सीधे थानाधिकारी के चैंबर में घुस गए। उनकी मांग थी कि स्कूल के प्रिंसिपल को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। रात के सन्नाटे में थाने के बाहर 'न्याय दो' के नारे गूँज रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की लेकिन प्रदर्शनकारी टस से मस नहीं हुए।

प्रिंसिपल विलियम डिसूजा की पेशी

बढ़ते दबाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन को झुकना पड़ा। देर रात पुलिस ने सेंट एंथोनी स्कूल के प्रिंसिपल विलियम डिसूजा को थाने बुलाया। प्रिंसिपल के पहुँचते ही माहौल और भी गरमा गया। समाज के प्रतिनिधि मंडल और पुलिस अधिकारियों के बीच घंटों तक बंद कमरे में वार्ता चली। पुलिस ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।

मुआवजे और कार्रवाई पर बनी सहमति

परिजनों और समाज के लोगों ने स्कूल प्रबंधन पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की। उन्होंने लिखित रिपोर्ट देते हुए आरोप लगाया कि यह हादसा नहीं बल्कि लापरवाही से की गई हत्या है। काफी गहमागहमी और लंबी बातचीत के बाद आर्थिक मुआवजे पर सहमति बनी। साथ ही पुलिस ने उचित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया तब जाकर धरना समाप्त हुआ।

मानवाधिकार आयोग का सख्त रुख

इस घटना ने सरकारी महकमों में भी हलचल पैदा कर दी है। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जी.आर. मूलचंदानी ने घटना को अत्यंत दुखद और गंभीर बताया है। उन्होंने उदयपुर के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है।

प्रशासन से मांगी गई तथ्यात्मक रिपोर्ट

आयोग ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि इस पूरी घटना की तथ्यात्मक रिपोर्ट जल्द पेश की जाए। आयोग यह जानना चाहता है कि स्कूल परिसर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की गई। क्या पोल को सही तरीके से फिक्स नहीं किया गया था? इसकी जिम्मेदारी किसकी थी?

स्कूलों की सुरक्षा जांच के निर्देश

मानवाधिकार आयोग ने केवल इस स्कूल तक ही सीमित न रहकर पूरे प्रदेश के लिए निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में खेल उपकरणों की जांच की जाए। बिजली के खंभों, झूलों और पोल की मजबूती को परखा जाए ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

स्कूल प्रबंधन की लापरवाही पर सवाल

सेंट एंथोनी स्कूल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह की चूक कई सवाल खड़े करती है। क्या स्कूल प्रशासन नियमित रूप से खेल के मैदान का ऑडिट करता है? क्या पुराने और जर्जर हो चुके पोल को बदलने की जहमत उठाई गई थी? इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच में तलाशे जाएंगे।

समाज में बढ़ता आक्रोश

उदयपुर के स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्कूलों की फीस तो आसमान छू रही है लेकिन सुरक्षा के नाम पर शून्य है। माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित समझकर स्कूल भेजते हैं। लेकिन अगर स्कूल ही असुरक्षित हो जाएं तो वे कहाँ जाएं? इस घटना ने पैरेंट्स एसोसिएशन को भी सक्रिय कर दिया है।

कानूनी प्रक्रिया और धाराएं

पुलिस ने फिलहाल परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें लापरवाही से मौत की धाराओं के साथ-साथ अन्य कठोर प्रावधान भी जोड़े जा सकते हैं। पुलिस अब स्कूल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य गवाहों के बयान दर्ज कर रही है।

एक चिराग बुझने का दर्द

मृतक बच्चे के घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। हर कोई यही कह रहा है कि जिस माँ ने अपना इकलौता बेटा खोया है, उसकी भरपाई कोई मुआवजा नहीं कर सकता। लोगों की मांग है कि दोषियों को ऐसी सजा मिले जो मिसाल बने।

शिक्षा विभाग की भूमिका

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने भी आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। शिक्षा विभाग यह देख रहा है कि क्या स्कूल के पास खेल मैदान के संचालन के आवश्यक प्रमाण पत्र थे। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो स्कूल की मान्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है।

निष्कर्ष और भविष्य की राह

यह हादसा एक सबक है उन सभी संस्थानों के लिए जो सुरक्षा को हल्के में लेते हैं। उदयपुर की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं है, उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए। करणी सेना ने साफ कर दिया है कि यदि कार्रवाई में ढिलाई बरती गई तो वे फिर से सड़कों पर उतरेंगे।

अंतिम विदाई और गमगीन माहौल

बुधवार को मासूम का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। हर आँख नम थी और हर दिल में गुस्सा था। अब सबकी नजरें पुलिस की चार्जशीट और मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि न्याय केवल कागजों पर न रहे।

शेयर करें:

ताज़ा खबरें