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उज्जैन सड़क चौड़ीकरण विवाद: उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण से 20 से अधिक मंदिरों पर संकट

thinQ360 · 18 अक्टूबर 2026, 10:45 दोपहर
मध्य प्रदेश के उज्जैन में अंकपात-खाकचौक मार्ग को 100 फीट चौड़ा करने की यूडीए की योजना के तहत 20 से अधिक प्राचीन मंदिरों पर लाल निशान लगाए गए हैं, जिस पर पुजारियों ने आपत्ति जताई है।

उज्जैन | मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ-2028 से जुड़े विकास कार्य तीव्र गति से चल रहे हैं। इसी बीच शहर के अंकपात से खाकचौक तक सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों को प्रभावित करने का बड़ा कारण बन गया है।

खड़े हनुमानजी की प्रतिमा के विस्थापन का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि यूडीए की ओर से करीब 45 फीट चौड़े मार्ग को 100 फीट तक चौड़ा करने की योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत 20 से अधिक मंदिरों और धर्मस्थलों पर लाल निशान लगाए गए हैं।

प्रशासन की कार्रवाई से पुजारियों की बढ़ी चिंता

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर पुजारियों की चिंता बढ़ गई है। इन सभी मंदिरों का गहरा पौराणिक महत्त्व है।

इनमें एक मंदिर ऐसा भी मौजूद है जिसे स्वयं माता सीता द्वारा स्थापित किए जाने की धार्मिक मान्यता है।

पुजारियों का कहना है कि वे सिंहस्थ के लिए विकास कार्यों के विरोधी बिल्कुल नहीं हैं। हालांकि, सड़क की चौड़ाई तय करते समय मंदिरों की प्राचीनता, मूर्तियों की सुरक्षा और पूजा-पद्धतियों का पूरा ध्यान रखा जाए।

पुजारियों ने 100 फीट के बजाय करीब 80 फीट चौड़ी सड़क का विकल्प सुझाया है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से विस्तृत चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लेने की मांग उठाई है।

प्रमुख मंदिरों के पुजारियों के बयान और आंदोलन की चेतावनी

लक्ष्मीनारायण मंदिर के पुजारी लोकेश गुरु के मुताबिक, चौड़ीकरण से मंदिर का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। आगे का हिस्सा हटने पर पूजा और भगवान को विराजित करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचेगी।

पुजारी ने बताया कि तीन वर्ष पहले मंदिर के जीर्णोद्धार और सौदर्याकरण पर 14 लाख रुपए खर्च किए गए थे। पुजारियों का कहना है कि वे विकास के लिए जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन धार्मिक गतिविधियों के लिए स्थान सुरक्षित रहे।

वहीं, उत्तरामुखी हनुमान मंदिर के पुजारी अमित पाठक ने चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर इस मामले का उचित समाधान नहीं निकला और मंदिरों पर कार्रवाई हुई तो आंदोलन किया जाएगा।

पौराणिक महत्व और प्रभावित होने वाले धार्मिक स्थल

अष्ट विनायक में शामिल अविघ्न विनायक गणेश मंदिर के पुजारी अश्विन शुक्ला ने बताया कि मौजूदा निशान के अनुसार मंदिर का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। धार्मिक ग्रंथों में इस मंदिर की प्राचीनता का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

मान्यता है कि 14 वर्ष के वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता उज्जैन आए थे, तब माता सीता ने इस गणेश प्रतिमा की स्थापना की थी। साल 2004 के सिंहस्थ में भी मंदिर का आगे का मंडप प्रभावित हुआ था।

पुजारियों ने हांडीफोड़ भैरव मंदिर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि की अष्टमी पर होने वाली नगर पूजा सहित कई परंपराओं से जुड़े स्थलों पर असर पड़ सकता है।

प्रभावित होने वाले प्रमुख मंदिर और आश्रम

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