भारत

UN दूत: भारत ने तोड़ा कानून: UN दूत का भारत पर बड़ा आरोप: इजराइल को हथियार भेजकर तोड़ा अंतरराष्ट्रीय कानून, ग्लोबल सिस्टम पर उठ रहे सवाल

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 21 अप्रैल 2026, 04:07 दोपहर
संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बनीज ने अपनी रिपोर्ट में भारत पर इजराइल को हथियार भेजकर अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इससे ग्लोबल सिस्टम कमजोर हो रहा है और भारत को इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी।

वॉशिंगटन डीसी | संयुक्त राष्ट्र की एक नई और चौंकाने वाली रिपोर्ट ने भारत की विदेश नीति और इजराइल के साथ उसके सैन्य संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बनीज ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का सीधा आरोप लगाया है। यह रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।

‘टॉर्चर एंड जेनोसाइड’ नाम की इस विस्तृत रिपोर्ट को 23 मार्च को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पेश किया गया था। इस रिपोर्ट में भारत की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी को लेकर कई कड़े तर्क दिए गए हैं। द हिंदू के साथ एक विशेष साक्षात्कार में अल्बनीज ने कहा कि इजराइल के साथ भारत के करीबी सैन्य संबंध अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसके दायित्वों का उल्लंघन कर रहे हैं।

भारत पर लगे गंभीर आरोप

अल्बनीज ने चेतावनी दी कि भारत को भविष्य में इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह ठहराया जा सकता है। उनका मुख्य तर्क यह है कि जब कोई देश युद्ध अपराधों के आरोपी राष्ट्र को हथियार प्रदान करता है, तो वह परोक्ष रूप से उन कृत्यों में भागीदार बन जाता है। भारत द्वारा इजराइल को हथियारों का निर्यात करना इसी श्रेणी में आता है।

रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने पहले ही इजराइल के कब्जे को अवैध और गलत करार दिया है। न्यायालय ने दुनिया के तमाम देशों से अपील की थी कि वे इजराइल के साथ हथियारों का लेन-देन तुरंत बंद करें। UN दूत के अनुसार, भारत द्वारा इन निर्देशों की अनदेखी करना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह पूरी वैश्विक व्यवस्था को भी कमजोर कर रहा है।

गाजा: एक विशाल यातना शिविर

रिपोर्ट में गाजा की स्थिति का वर्णन करते हुए उसे एक 'यातना शिविर' बताया गया है। अक्टूबर 2023 से इजराइल ने गाजा और अन्य डिटेंशन सेंटर्स में फिलिस्तीनियों के खिलाफ व्यवस्थित तरीके से प्रताड़ना का इस्तेमाल किया है। अल्बनीज का कहना है कि गाजा में रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिक केवल युद्ध की मार नहीं झेल रहे, बल्कि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ने के लिए संस्थागत प्रयास किए जा रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि टॉर्चर केवल जेलों की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। निगरानी, फेस रिकग्निशन, ड्रोन और चेकपॉइंट्स के जरिए फिलिस्तीनियों के जीवन के हर पहलू पर लगातार नियंत्रण रखा जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक के कारण गाजा के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी एक तरह के मानसिक और सामाजिक दबाव में तब्दील हो गई है। वे अपने ही घर में एक कैदी की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं।

भारत की नैतिक जिम्मेदारी और वैश्विक छवि

अल्बनीज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा और दोनों देशों के बीच ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, यह बढ़ती नजदीकी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के सिद्धांतों के खिलाफ जाती दिख रही है। उन्होंने भारत को उसके समृद्ध इतिहास की याद दिलाई, जो हमेशा से न्याय और सत्य के पक्ष में रहा है। भारत की न्यायपूर्ण सोच और उसके वैश्विक मूल्य वर्तमान सरकार के फैसलों से मेल नहीं खा रहे हैं।

गाजा में हालात इस कदर खराब हैं कि करीब 1,90,000 लोग 50 वर्ग किमी से भी कम इलाके में रहने को मजबूर हैं। वहां दवाइयों, साफ-सफाई और बुनियादी सुरक्षा की भारी कमी है, जिससे बीमारियां फैल रही हैं। अल्बनीज ने इस स्थिति को “कंसंट्रेशन कैंप” से भी बदतर बताया है। उन्होंने कहा कि भूख को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना और लोगों को बुनियादी जरूरतों से वंचित रखना, उनकी उम्मीदों को खत्म करने की एक सोची-समझी साजिश है।

संस्थागत प्रताड़ना और भविष्य की राह

रिपोर्ट में वकीलों, डॉक्टरों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जानबूझकर निशाना बनाए जाने का भी जिक्र है। जब प्रताड़ना को राज्य की नीति बना दिया जाता है, तो वह व्यक्तिगत घटना न रहकर एक संस्थागत अपराध बन जाता है। कोलंबिया, साउथ अफ्रीका, स्पेन, स्लोवेनिया और मलेशिया जैसे देश इस स्थिति को रोकने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कुछ प्रभावशाली समूहों के कारण कड़ी कार्रवाई करने में बाधा आ रही है।

भारत की ऐतिहासिक विरासत अहिंसा और न्याय की रही है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय दूत का यह बयान भारत की छवि पर वैश्विक मंच पर असर डाल सकता है। अल्बनीज का तर्क है कि भारत जैसे बड़े लोकतंत्र को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करना ही एक सुरक्षित और न्यायपूर्ण विश्व के निर्माण का एकमात्र रास्ता है। अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अब भी सख्त कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में ग्लोबल सिस्टम पूरी तरह चरमरा सकता है।

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)