तेहरान | पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक अत्यंत विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकाने, खार्ग आइलैंड पर भीषण हवाई हमला किया है। यह कार्रवाई डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई सख्त चेतावनी और डेडलाइन के खत्म होने से ठीक पहले की गई है।
ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर चोट
खार्ग आइलैंड ईरान के लिए आर्थिक रूप से सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां से देश का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल वैश्विक बाजारों में निर्यात किया जाता है। अमेरिकी हमले में न केवल तेल भंडारों बल्कि मिसाइल डिपो को भी निशाना बनाया गया है। इस हमले के बाद ईरान की तेल आपूर्ति पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीतिक प्रहार से ईरान की अर्थव्यवस्था को ऐसा गहरा जख्म मिला है जिससे उबरने में उसे दशकों लग सकते हैं।
ट्रंप की सख्त चेतावनी और सैन्य दबाव
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी थी। डेडलाइन खत्म होने से पहले ही इस स्तर की सैन्य कार्रवाई ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इसे अमेरिका के नए और आक्रामक सैन्य रुख के तौर पर देखा जा रहा है। तेहरान और उसके आसपास के इलाकों से भी भीषण धमाकों की खबरें मिल रही हैं। इसके अलावा इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में भी विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं। इजरायल ने भी इसी दौरान ईरान के कुछ गुप्त ठिकानों पर सटीक हमले करने का दावा किया है।
रेलवे नेटवर्क और जनहानि का विवरण
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, कशान क्षेत्र में याह्या अबाद रेलवे ब्रिज को निशाना बनाया गया है। इस्फहान प्रांत के अधिकारी अकबर सालेही ने पुष्टि की है कि इस हमले में 2 लोगों की जान गई है और 3 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। मशहद शहर में रेलवे सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गई हैं। इजराइली सुरक्षा एजेंसियों ने एक एडवाइजरी जारी कर ईरानी नागरिकों को रेल नेटवर्क और सैन्य ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी है। इससे स्थानीय आबादी में भारी दहशत का माहौल है।
वैश्विक बाजार और भारत पर प्रभाव
इस सैन्य संघर्ष का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दिखना शुरू हो गया है। कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका है। यदि सप्लाई चेन बाधित होती है, तो भारत जैसे देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। अमेरिकी शेयर बाजार में भी इस अनिश्चितता के चलते बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों को डर है कि यदि यह संघर्ष पूर्ण युद्ध में बदला, तो वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अब ईरान की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।