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Trade Deal: अमेरिका का भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव

बलजीत सिंह शेखावत · 03 जून 2026, 03:34 दोपहर

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत जारी है। इसी बीच अमेरिका ने भारत सहित कई देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया है जो कथित तौर पर जबरन श्रम (Forced Labor) से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं।

12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव

USTR ने अमेरिकी व्यापार कानून के सेक्शन 301 के तहत की गई 60 जांचों के निष्कर्ष जारी करते हुए कहा कि भारत समेत 54 देश ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उन्हें लागू करने में विफल रहे हैं, जिनका उत्पादन जबरन श्रम के जरिए किया गया हो। इसी आधार पर इन देशों से आने वाले सामानों पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया गया है।

USTR ने क्या कहा?

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार, जिन देशों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू किया है या अमेरिका के साथ किसी पारस्परिक व्यापार समझौते के तहत ऐसा करने की प्रतिबद्धता जताई है, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।

वहीं, जो देश इन मानकों को पूरा नहीं करते हैं, उनके लिए 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित किया गया है। भारत को इसी श्रेणी में रखा गया है।

सूची में शामिल हैं कई बड़े व्यापारिक साझेदार

USTR द्वारा जारी सूची में भारत के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड और वियतनाम समेत कुल 54 देशों के नाम शामिल हैं।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का बयान

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि एम्बेसडर Jamieson Greer ने कहा कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहना स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार, इससे अमेरिकी श्रमिकों और उद्योगों को वैश्विक बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ताओं पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह एक प्रस्ताव है और इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।

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