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Cricket: वैभव सूर्यवंशी की उम्र पर बवाल, 15, 17 या 20 साल?

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 05 जून 2026, 12:00 दोपहर
IPL स्टार वैभव सूर्यवंशी की उम्र पर फिर उठा सवाल, अलग-अलग रिपोर्ट में 15, 17 और 20 साल का होने का दावा।

पटना | आईपीएल में अपने प्रदर्शन से धूम मचाने वाले युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका खेल नहीं, बल्कि उनकी उम्र को लेकर छिड़ा विवाद है। आधिकारिक तौर पर 15 साल के बताए जा रहे वैभव की उम्र पर अलग-अलग रिपोर्ट्स में गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिससे भारतीय क्रिकेट में उम्र की हेराफेरी का मुद्दा फिर गरमा गया है।

वैभव की उम्र का मायाजाल: 15, 17 या 20?

वैभव सूर्यवंशी की उम्र को लेकर भ्रम की स्थिति तब पैदा हुई जब कई मीडिया संस्थानों ने अलग-अलग दावे पेश किए। यह मामला सिर्फ एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिस्टम की खामियों की ओर भी इशारा करता है।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने छेड़ी नई बहस

इस पूरे विवाद की शुरुआत ऑस्ट्रेलियाई न्यूज पोर्टल फॉक्स स्पोर्ट्स की एक रिपोर्ट से हुई। इस रिपोर्ट में क्रिकेट लेखक गिडियन हेग के हवाले से दावा किया गया कि वैभव की उम्र 20 साल है। हेग ने बताया कि पिछले साल जब वैभव से उनकी उम्र के बारे में पूछा गया तो उन्होंने खुद को 19 साल का बताया था।

हेग ने लिखा, "जिस सूत्र पर मैं भरोसा करता हूं, उसने मुझे यह जानकारी दी है। उसके पास झूठ बोलने की कोई वजह नहीं होगी।" इस दावे ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी।

खुद वैभव के बयान से उलझा मामला

वहीं, एक स्थानीय समाचार पोर्टल 'बीएनएन न्यूज बेनीपट्टी' के साथ 2023 के एक इंटरव्यू में वैभव ने कुछ और ही कहा था। उन्होंने बताया था कि वह उस साल सितंबर में 14 साल के हो जाएंगे। इस हिसाब से उनकी उम्र इस साल 17 साल होनी चाहिए। यह उनकी कागजी उम्र से लगभग डेढ़ साल ज्यादा है।

आधिकारिक रिकॉर्ड्स, जैसे कि क्रिकबज पर उपलब्ध जानकारी, के अनुसार वैभव का जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ था। इसके मुताबिक, वह अभी सिर्फ 15 साल के हैं। उन्होंने 14 साल की उम्र में आईपीएल डेब्यू किया था।

परिवार का पक्ष और बोन टेस्टिंग का सच

उम्र को लेकर उठ रहे सवालों के बीच वैभव के परिवार ने पुरजोर तरीके से उनका बचाव किया है। उनके पिता ने सभी आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि उनके पास उम्र साबित करने के लिए पुख्ता सबूत हैं।

पिता ने किया आरोपों का खंडन

पिछले साल भी जब वैभव ने आईपीएल में सबसे कम उम्र में शतक बनाया था, तब भी यह मुद्दा उठा था। उस समय उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने कहा था, "मेरे बेटे ने उम्र साबित करने के लिए बोन टेस्टिंग करवाई है।"

उन्होंने आगे बताया, "जब वह साढ़े आठ साल का था, तब उसने पहली बार बीसीसीआई में बोन टेस्ट दिया था। वह इंडिया अंडर-19 के लिए भी खेल चुका है। हमें किसी से डर नहीं है। वह फिर से एज टेस्ट करवा सकता है।"

सोशल मीडिया पर लगे गंभीर आरोप

इन दावों के बावजूद, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सूर्यवंशी और उनके परिवार पर दस्तावेजों में हेरफेर करने का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि उम्र कम दिखाकर उन्हें जूनियर स्तर पर अनुचित लाभ दिया गया।

भारतीय क्रिकेट का पुराना मर्ज: उम्र की धोखाधड़ी

भारत में युवा क्रिकेटरों द्वारा अपनी उम्र में हेरफेर करना कोई नई बात नहीं है। यह एक ऐसी समस्या है जो दशकों से भारतीय क्रिकेट की जड़ों को खोखला कर रही है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें बेहतर अवसरों की तलाश और चयनकर्ताओं को प्रभावित करना शामिल है।

क्यों होती है उम्र में हेराफेरी?

अक्सर कोच और माता-पिता अपने बच्चों को आयु-वर्ग के टूर्नामेंटों में खिलाने के लिए उनकी जन्मतिथि बदलवा देते हैं। कम उम्र में बड़े और मजबूत खिलाड़ी होने का फायदा मिलता है, जिससे वे बेहतर प्रदर्शन करते हैं और चयनकर्ताओं की नजर में आ जाते हैं।

पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने 2015 में इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा था, "यह पूरी कवायद तब शुरू होती है जब कोई कोच किसी स्थानीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए खिलाड़ी की जन्मतिथि बदल देता है। माता-पिता भी खुशी-खुशी एक या दो साल का फायदा मान लेते हैं।"

द्रविड़ ने स्पष्ट किया था कि गलत उम्र बताने वाला खिलाड़ी इसलिए सफल नहीं होता कि वह ज्यादा प्रतिभाशाली है, बल्कि इसलिए कि वह अपनी उम्र के बच्चों से शारीरिक रूप से ज्यादा मजबूत होता है।

BCCI के सामने क्या हैं चुनौतियां?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इस समस्या से निपटने के लिए बोन टेस्टिंग जैसे उपाय अपनाए हैं। हालांकि, लोग इसका भी तोड़ निकाल रहे हैं। क्रिकबज की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, कुछ माता-पिता असली खिलाड़ियों की जगह उनके छोटे भाई-बहनों को बोन टेस्टिंग के लिए भेज देते थे।

यह दिखाता है कि सिस्टम में हेरफेर करने की प्रवृत्ति कितनी गहरी है। बीसीसीआई के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह कैसे इस धोखाधड़ी को पूरी तरह से रोक पाए।

वैभव सूर्यवंशी का मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट के लिए एक चेतावनी है। जब तक इस समस्या को जड़ से खत्म नहीं किया जाता, तब तक असली प्रतिभाओं के साथ अन्याय होता रहेगा और सिस्टम पर सवाल उठते रहेंगे।

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