समस्तीपुर | बिहार के एक छोटे से शहर से निकला एक 15 साल का लड़का आज पूरे देश की आंखों का तारा बन गया है। वैभव सूर्यवंशी ने भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाकर इतिहास रच दिया है, लेकिन इस चमक के पीछे एक पिता के त्याग और संघर्ष की एक लंबी कहानी है।
यह कहानी है वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी की, जिन्होंने अपने बेटे के सपने को अपना बना लिया और उसे पूरा करने के लिए अपनी विरासत तक दांव पर लगा दी।
एक पिता का अतुलनीय त्याग
हर सफल इंसान के पीछे किसी न किसी का हाथ होता है, और वैभव के लिए वह हाथ उनके पिता संजीव का है। संजीव ने बेटे की प्रतिभा को बहुत पहले ही पहचान लिया था और उसे निखारने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी।
पुश्तैनी जमीन बेचकर खरीदा सपना
संजीव सूर्यवंशी को विरासत में पुश्तैनी जमीन का एक टुकड़ा मिला था। यह उनके लिए सिर्फ एक प्रॉपर्टी नहीं, बल्कि परिवार की यादों और जड़ों की निशानी थी।
लेकिन जब बेटे के क्रिकेट करियर को संवारने की बात आई, तो उन्होंने एक पल भी नहीं सोचा। उन्होंने उस जमीन को बेच दिया ताकि वैभव को बेहतरीन ट्रेनिंग और सुविधाएं मिल सकें।
आज सालों बाद जब उनका बेटा देश के लिए खेलने जा रहा है, तो उन्हें अपने उस फैसले पर गर्व है।
संजीव कहते हैं, "अब जमीन, पैसा, रुपया का कोई मायने नहीं रखता। हमें जो सम्मान मिल रहा है, देश-विदेश में नाम हो रहा है, उससे हम बहुत खुश हैं।"
90 किलोमीटर का मुश्किल सफर
त्याग सिर्फ जमीन बेचने तक ही सीमित नहीं था। वैभव को अच्छी कोचिंग दिलाने के लिए संजीव उन्हें हर दूसरे दिन समस्तीपुर से पटना ले जाते थे। यह सफर करीब 90 किलोमीटर का था।
यह यात्रा न केवल थका देने वाली थी, बल्कि महंगी भी थी। संजीव ने जमीन बेचकर मिले पैसों से एक कार खरीदी ताकि बेटे को ट्रेनिंग सेशन में ले जाने में आसानी हो। उन्होंने कभी भी इन मुश्किलों को अपने बेटे के सपने के आड़े नहीं आने दिया।
वैभव की मेहनत और प्रतिभा का कमाल
पिता के त्याग को वैभव ने अपनी मेहनत से सार्थक कर दिखाया। उनकी प्रतिभा की पहली झलक तब दिखी जब वह सिर्फ चार साल के थे और प्लास्टिक की गेंद पर भी अद्भुत टाइमिंग से शॉट लगाते थे।
IPL 2026 में मचाया धमाल
वैभव सूर्यवंशी का नाम पहली बार तब सुर्खियों में आया जब उन्होंने IPL 2026 में तहलका मचा दिया। वह 776 रनों के साथ टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर रहे।
उन्होंने न सिर्फ ऑरेंज कैप जीती, बल्कि इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन, मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर, बेस्ट स्ट्राइक रेट और मोस्ट सिक्सेस जैसे 5 बड़े अवॉर्ड्स पर कब्जा किया। यहीं से उनके टीम इंडिया में आने की नींव पड़ी।
इससे पहले वह 2026 में भारत की अंडर-19 वर्ल्ड कप जीत के भी हीरो रहे थे।
जब आया टीम इंडिया से बुलावा
पिछले हफ्ते जब आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान हुआ, तो उसमें वैभव का नाम भी शामिल था। इसी के साथ वह भारतीय सीनियर टीम के लिए चुने गए सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए।
पिता का भावुक पल
बेटे के चयन की खबर सुनकर संजीव की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने बताया कि जब खबर आई, वैभव श्रीलंका में प्रैक्टिस कर रहा था।
वैभव ने फोन पर कहा, "पापा मुझे अभी सिलेक्शन के बारे में पता चला। मैं आपसे बाद में बात करूंगा।" संजीव बताते हैं कि वहां हर कोई उसे बधाई दे रहा था, यह सुनकर उनकी आंखें भर आईं।
उन्होंने कहा, "बच्चा बचपन से बहुत मेहनत करता है। इसी के लिए मेहनत की थी कि देश के लिए खेले। आज उसे वो सौभाग्य मिला है।"
अब डेब्यू पर हैं सबकी नजरें
अब पूरा देश और खासकर बिहार, वैभव के अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। संजीव और उनका परिवार भी इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए इंग्लैंड जा रहा है।
यह कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर के बनने की नहीं है, बल्कि एक पिता के विश्वास, त्याग और एक बेटे के जुनून की है, जिसने हर मुश्किल को पार कर अपने सपने को हकीकत में बदल दिया। वैभव की यात्रा अभी शुरू हुई है, और उम्मीद है कि वह सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे।
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