जोधपुर | जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जोधपुर के बीसलपुर गांव में 'वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान' का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्तिकेय सिंह राठौड़ के नेतृत्व में हुए इस अभियान ने जल सुरक्षा के लिए सामुदायिक भागीदारी का एक सशक्त संदेश दिया।
इस अभियान में ग्रामीणों, महिला स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और जल योद्धाओं ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत कलश यात्रा और जल पूजन के साथ हुई, जिसने पारंपरिक मूल्यों के साथ संरक्षण के संदेश को जोड़ा।
जनभागीदारी से जल संरक्षण का संकल्प
अभियान के दौरान श्रमदान और वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। इन गतिविधियों ने न केवल जल संरक्षण के प्रति लोगों में नई चेतना जगाई, बल्कि पर्यावरण संतुलन की दिशा में भी एक ठोस कदम उठाया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्तिकेय सिंह राठौड़ ने राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है।
“पाणी राखो पत सूं, पत राख्यां सब होय। मेह रो रुतु आवे एक बार, पाणी राखो संभाल।”
उन्होंने इस लोक संदेश को दोहराते हुए कहा कि यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का मंत्र है।
महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भूमिका
अभियान की सफलता में महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। महिला स्वयं सहायता समूहों ने इस कार्यक्रम को एक नई ऊर्जा प्रदान की और इसे व्यापक सामाजिक आधार दिया।
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संवाद के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि बढ़ते जल संकट का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए जनभागीदारी और सामुदायिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
अभियान का उद्देश्य जल स्रोतों का पुनर्जीवन, भूजल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देकर जल संरक्षण को एक जनआंदोलन बनाना है।
कार्यक्रम के समापन पर कार्तिकेय सिंह राठौड़ ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस मुहिम को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया और कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही हम एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।
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