जयपुर | राजस्थान की प्यासी धरती को तृप्त करने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पानी सहेजने के उद्देश्य से प्रदेश में एक व्यापक जन आंदोलन की शुरुआत होने जा रही है। राजस्थान सरकार 'वंदे गंगा' जल संरक्षण अभियान के जरिए जल संचयन में जन भागीदारी बढ़ाने का संकल्प ले चुकी है।
राजस्थान का 'वंदे गंगा' महाभियान: वंदे गंगा अभियान: राजस्थान में जल संरक्षण का नया शंखनाद
सीएम भजनलाल शर्मा 25 मई से करेंगे 'वंदे गंगा' अभियान का आगाज।
HIGHLIGHTS
- 25 मई से 5 जून तक पूरे राजस्थान में चलेगा 'वंदे गंगा' जल संरक्षण अभियान।
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जयपुर के सीतापुरा स्थित JECC से करेंगे शुभारंभ।
- अभियान में श्रमदान, पौधारोपण और जल स्रोतों की सफाई पर रहेगा विशेष जोर।
- उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को दिया जाएगा 'जल गौरव' सम्मान।
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 25 मई को गंगा दशमी के पावन अवसर पर इस महाभियान का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। जयपुर के सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (JECC) से इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम की शुरुआत होगी।
यह अभियान 5 जून यानी विश्व पर्यावरण दिवस तक पूरे प्रदेश में पूरी ऊर्जा के साथ चलाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान के गिरते भू-जल स्तर को सुधारना और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना है।
अभियान की व्यापक रूपरेखा और तैयारियां
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शासन सचिवालय के चिंतन सभागार में तैयारियों को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। उन्होंने सभी विभागों को इस अभियान को मिशन मोड पर चलाने के निर्देश दिए।
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मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि 'वंदे गंगा' को केवल एक सरकारी कार्यक्रम न मानकर इसे एक जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाए। इसमें समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अभियान के तहत राजस्थान के हर जिले, ग्राम पंचायत और नगरीय निकाय में जल संरक्षण की गतिविधियों का संचालन होगा। सभी विभागों के आपसी समन्वय से एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।
जनभागीदारी और सामाजिक सहभागिता
इस अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार आम जनता और स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग होगा। मुख्य सचिव ने शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और युवा समूहों को इससे जोड़ने पर बल दिया है।
अभियान के दौरान श्रमदान, स्वच्छता गतिविधियां और प्रभात फेरियों का आयोजन किया जाएगा। जागरूकता रैलियों के माध्यम से लोगों को पानी की एक-एक बूंद बचाने की महत्ता के बारे में शिक्षित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप 'हरियालो राजस्थान' की तैयारियां भी इस अभियान के साथ ही शुरू हो जाएंगी। जल संचयन के साथ-साथ पर्यावरण संवर्धन को भी इस अभियान का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।
प्रमुख गतिविधियां और धार्मिक अनुष्ठान
वंदे गंगा अभियान के तहत जल स्रोतों के प्रति श्रद्धा भाव जगाने के लिए पारंपरिक अनुष्ठान भी किए जाएंगे। इसमें नदियों, बांधों, सरोवरों और नहरों की पूजा का कार्यक्रम शामिल है।
जल संसाधन विभाग किसानों के सहयोग से नहरों और खालों की साफ-सफाई सुनिश्चित करेगा। इसके साथ ही 'जल शक्ति अभियान: कैच द रैन' के अंतर्गत भी विभिन्न कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया जाएगा।
अभियान के दौरान वंदे गंगा कलश यात्रा, पीपल पूजन और पौधारोपण जैसे कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किए जाएंगे। संकल्प कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई जाएगी।
हरियालो राजस्थान और नवीन कार्य
अभियान के दौरान औरण और चारागाहों का चिह्नीकरण किया जाएगा। 'कर्मभूमि से मातृभूमि' अभियान के तहत पूर्व में स्वीकृत कार्यों का अवलोकन और नए कार्यों की स्वीकृति भी प्रदान की जाएगी।
26 मई को प्रदेश भर में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन होगा। इन ग्राम सभाओं में जल संरक्षण के नए कार्यों का अनुमोदन किया जाएगा और ग्रामीणों को इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर ईको-फ्रेंडली उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री को भी बढ़ावा दिया जाएगा। नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जल संरक्षण के संदेश को घर-घर तक पहुँचाने की योजना बनाई गई है।
विभागीय जिम्मेदारियां और विशेष प्रयास
विभिन्न सरकारी विभाग इस अभियान में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाएंगे। गौशालाओं, पशु चिकित्सालयों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान चलाए जाएंगे।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) द्वारा जल परीक्षण अभियान चलाया जाएगा। इससे लोगों को स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता और जल की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग औद्योगिक संस्थानों में 'ग्रीन ऑफिस इनिशिएटिव' और 'एनर्जी ऑडिट' को बढ़ावा देगा। निजी और राजकीय कार्यालयों को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए जागरूक किया जाएगा।
जल स्वावलम्बन और श्रमदान के विशेष दिन
मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के तहत नए कार्यों का शिलान्यास और भूमि पूजन भी इसी अवधि में किया जाएगा। जल चौपालों के माध्यम से स्थानीय जल समस्याओं का समाधान खोजा जाएगा।
31 मई को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा विशेष श्रमदान किया जाएगा। इस दिन पक्षियों के लिए परिंडे बांधने जैसे सेवा कार्य भी किए जाएंगे।
स्वायत्त शासन विभाग द्वारा जल स्रोतों पर दीप प्रज्ज्वलन और महापुरुषों की प्रतिमाओं की सफाई की जाएगी। अमृत 2.0 योजना के तहत पूर्ण कार्यों का लोकार्पण भी इसी दौरान संपन्न होगा।
कृषि और वन विभाग की पहल
कृषि विभाग द्वारा किसानों को सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों जैसे स्प्रिंकलर और ड्रिप इरिगेशन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए विशेष कार्यशालाएं और प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी।
प्रगतिशील किसानों के साथ किसान चौपाल में चर्चा होगी। कृषि विज्ञान केंद्रों पर संगोष्ठियां आयोजित कर जैविक खेती और कंपोस्टिंग तकनीक के प्रति जागरूकता फैलाई जाएगी।
वन विभाग द्वारा 4 जून को 'रन फॉर एनवायरनमेंट' का आयोजन किया जाएगा। आमजन को तुलसी के पौधे वितरित किए जाएंगे ताकि घर-घर में हरियाली और स्वास्थ्य का संदेश पहुंचे।
निगरानी और जल गौरव सम्मान
मुख्य सचिव ने जल संचय जन भागीदारी 2.0 (JSJB) पोर्टल पर दैनिक प्रगति रिपोर्ट अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत और नगर निगम वार्ड के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
अभियान के अंत में 5 जून को जिला स्तर पर समापन समारोह होंगे। जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को 'जल गौरव सम्मान' से नवाजा जाएगा।
जल संरक्षण केवल एक सरकारी नीति नहीं, बल्कि राजस्थान की संस्कृति का हिस्सा है। वंदे गंगा अभियान के माध्यम से हम प्रत्येक नागरिक को जल प्रहरी बनाने का लक्ष्य रखते हैं।
वंदे गंगा अभियान राजस्थान में जल प्रबंधन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। जन-जन के सहयोग से यह अभियान न केवल जल संकट को दूर करेगा, बल्कि प्रदेश की पारिस्थितिकी को भी समृद्ध बनाएगा।
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