राजस्थान

अकबर नहीं, प्रताप महान: देवनानी: अकबर को महान पढ़कर पीड़ा होती थी, हमने विश्व को खोजा: देवनानी

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 24 मई 2026, 05:20 शाम
बांसवाड़ा में विस अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इतिहास और शिक्षा पर दिए बड़े बयान।

बांसवाड़ा | राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बांसवाड़ा दौरे के दौरान इतिहास और भारतीय संस्कृति पर तीखे और स्पष्ट विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं को महान बताना हमारी जड़ों को कमजोर करने की साजिश थी।

अकबर नहीं, महाराणा प्रताप हैं महान

देवनानी ने कहा कि जब वे छात्र थे और 'अकबर महान' पढ़ते थे, तो उन्हें बहुत पीड़ा होती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस आक्रांता ने देश पर हमला किया, उसे महान कैसे कहा जा सकता है?

इसी सोच के साथ शिक्षा मंत्री बनते ही उन्होंने पाठ्यक्रम में बदलाव किया। उन्होंने अकबर की जगह महाराणा प्रताप के शौर्य को प्राथमिकता दी और उन्हें इतिहास में 'महान' के रूप में मजबूती से स्थापित किया।

उनका मानना है कि नई पीढ़ी को अपने वास्तविक नायकों के बारे में जानना चाहिए। महाराणा प्रताप का त्याग और बलिदान भारतीय अस्मिता का प्रतीक है, जिसे दबाया नहीं जा सकता।

वास्कोडिगामा ने नहीं, हमने विश्व को खोजा

इतिहास की पुस्तकों में भारत की खोज का श्रेय वास्कोडिगामा को दिए जाने पर भी उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति हजारों साल पुरानी है और भारत ने हमेशा दुनिया को राह दिखाई है।

"हमने विश्व को खोजा है, हमको किसी ने नहीं खोजा। वास्कोडिगामा जैसे लोग हमें क्या खोजेंगे, हमारी जड़ें तो हजारों साल गहरी हैं। अंग्रेजों ने हमें अपनी जड़ों से काटने का काम किया है।"

देवनानी ने स्पष्ट किया कि भारत की प्राचीनता और ज्ञान-विज्ञान विश्व में सर्वोपरि रहा है। विदेशी इतिहासकारों ने हमारे गौरवशाली इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया, जिसे अब सुधारा जा रहा है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय अध्ययन पीठ का शुभारंभ

देवनानी ने गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय (GGTU) में पंडित दीनदयाल उपाध्याय अध्ययन पीठ का उद्घाटन किया। इस दौरान कुलपति केशव ठाकुर और विधायक कैलाश मीणा सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

उन्होंने शिक्षा और भारतीय चिंतन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एकात्म मानववाद का सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है। यह पीठ छात्रों को भारतीय मूल्यों और दर्शन के करीब लाने का कार्य करेगी।

विश्वविद्यालय पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने युवा शक्ति से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति पर गर्व करें और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

बांसवाड़ा का बदलता स्वरूप और आस्था

विधानसभा अध्यक्ष ने 1970 के दशक की तुलना में आज के बांसवाड़ा के विकास की सराहना की। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्राथमिकताओं और डबल इंजन सरकार के प्रयासों का परिणाम बताया।

उन्होंने कहा कि बांसवाड़ा में सड़कों और बुनियादी सुविधाओं में बड़ा सुधार हुआ है। कार्यक्रम के बाद उन्होंने प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन किए और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

देवनानी का यह दौरा शिक्षा प्रणाली में 'स्व' के बोध को जगाने की दिशा में एक बड़ा संकेत है। उनके विचार इतिहास के पुनर्लेखन और सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना पर केंद्रित रहे।

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